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गरियाबंद : आवास, ट्राईसाइकिल और बकाया मजदूरी के लिए दिव्यांग  अनिल यादव की भूख हड़ताल जारी

*गरियाबंद।* गरियाबंद के जंतर-मंतर गांधी मैदान में बरगद पेड़ के चबूतरे के नीचे अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे दिव्यांग अनिल यादव की हड़ताल का आज चौथा दिन है। प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस हल नहीं निकला है।

अनिल की तीन प्रमुख मांगें हैं – वह आवासहीन है, उसे छत चाहिए। दिव्यांग होने के कारण उसे ट्राईसाइकिल चाहिए। वह वन विभाग में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी था, जिसे काम से हटा दिया गया है, उसे उसकी मजदूरी का बकाया भुगतान चाहिए।

बीते दिन मजदूरी के मामले को लेकर वन विभाग की रेंज ऑफिसर प्रांजली मिश्रा हड़ताल स्थल पर पहुंचीं और बताया कि अनिल की किसी भी प्रकार की मजदूरी शेष नहीं है, 2017 तक का पूरा भुगतान कर दिया गया है।

वहीं तहसीलदार गरियाबंद मयंक अग्रवाल ने भी अनिल से चर्चा की। उन्होंने कहा कि अनिल भूमिहीन है, जिसके कारण उसे पीएम आवास स्वीकृत नहीं किया जा सकता। अगर वह सहमत हो तो रैन बसेरा में रहने का इंतजाम किया जा सकता है, लेकिन अनिल ने स्थायी आवास की मांग पर अड़े रहने की बात कही।

उल्लेखनीय है कि नगर पालिका अंतर्गत कई पीएम आवासों को हितग्राहियों द्वारा बेचे जाने की शिकायत पर पालिका ने कई मकान सील किए हैं। उन्हीं मकानों को आवास के रूप में उपलब्ध कराया जा सकता है, परंतु अधिकारियों ने नियमों का हवाला देकर असमर्थता जता दी।

आखिर अनिल की इन छोटी-छोटी मांगों का हल जिला प्रशासन चुटकियों में कर सकता है, पर कर नहीं पा रहा है। सवाल यह है कि क्या दिव्यांग को भूख हड़ताल में बने रहने के लिए मजबूर किया जा रहा है?

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