*गरियाबंद।* छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से एक बेहद मार्मिक मामला सामने आया है। वार्ड नंबर 15, काली मंदिर के पास बरगद के पेड़ के नीचे खुले में जीवन गुजारने को मजबूर एक दिव्यांग ने प्रशासन से आवास, इलाज और रोजगार नहीं मिलने पर आमरण अनशन और इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी है।

पीड़ित का नाम *अनिल यादव, पिता स्व. शशि यादव* है। उन्होंने 22 सितंबर 2026 को कलेक्टर जनदर्शन में टोकन क्रमांक *2190126001861* के जरिए आवेदन दिया है। आवेदन की प्रति उन्होंने मुख्यमंत्री, SP, SDM और तहसीलदार गरियाबंद को भी प्रेषित की है।
*आवेदन में चार प्रमुख मांगें रखी हैं:*
*1. पक्का आवास:* अनिल का कहना है कि उसके पास रहने को घर नहीं है, कड़ाके की धूप, बारिश और ठंड में वह बरगद के पेड़ के नीचे रहने को मजबूर है। शासकीय योजना के तहत पक्का मकान दिया जाए।
2. वन विभाग में बकाया भुगतान:* पीड़ित पूर्व में वन विभाग (फॉरेस्ट) में दैनिक वेतनभोगी के रूप में कार्यरत था। उसकी बकाया मजदूरी का भुगतान अब तक नहीं हुआ है और उसे पुनः काम पर रखने की मांग की है।
3. रोजगार और निःशुल्क इलाज:* दिव्यांगता और खराब आर्थिक स्थिति के चलते आजीविका चलाने के लिए रोजगार और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए निःशुल्क इलाज की व्यवस्था की जाए।
4. ट्राइसाइकिल:* आवागमन में हो रही कठिनाई को देखते हुए शासन से एक ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराने की मांग की है।
अनिल यादव ने आवेदन में लिखा है कि यदि *3 दिवस के भीतर* उनकी जायज मांगों का निराकरण नहीं होता है तो वह *आमरण अनशन (भूख हड़ताल)* पर बैठने को मजबूर होगा।
जिला प्रशासन की ओर से अभी इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। अब देखना होगा कि जनदर्शन के इस टोकन पर प्रशासन क्या कार्रवाई करता है।


