गरियाबंद में बड़ी कार्रवाई: 21 लाख रुपये की अवैध राशि बरामद, दो आत्मसमर्पित महिला नक्सली कैडर और एक नव आरक्षक गिरफ्तार
मैनपुर के राजाडेरा पहाड़ी क्षेत्र में जिला पुलिस की स्पेशल टीम की कार्रवाई, काले बैग में टिफिन के भीतर छिपाकर रखे गए थे 500-500 रुपये के नोट
गरियाबंद। जिले में नक्सल गतिविधियों से जुड़े एक बड़े मामले का खुलासा हुआ है। थाना मैनपुर अंतर्गत ग्राम राजाडेरा के पहाड़ी क्षेत्र में माओवादियों द्वारा डंप करके रखी गई 21 लाख रुपये की राशि को अवैध रूप से बरामद करने के मामले में जिला पुलिस ने दो आत्मसमर्पित महिला नक्सली कैडर और गरियाबंद जिले के एक नव आरक्षक को गिरफ्तार किया है।
जिला पुलिस बल गरियाबंद की स्पेशल टीम को 31 अक्टूबर 2026 को सूचना मिली थी कि राजाडेरा के पहाड़ी क्षेत्र में तीन संदिग्ध व्यक्ति घूम रहे हैं। सूचना पर पुलिस टीम को राजाडेरा जंगल की ओर रवाना किया गया। पहाड़ी के पास जंगल में दो महिलाएं और एक पुरुष काले रंग का बैग लेकर आते दिखाई दिए। पुलिस टीम ने घेराबंदी कर तीनों को पकड़ लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
पूछताछ में आरोपियों की पहचान निम्नानुसार हुई है।
- सिंगे उर्फ रोशनी – पिता माड़वी सुक्का, उम्र 25 वर्ष, निवासी ग्राम गामगुलवार, थाना चिंतलनार, जिला सुकमा।
- बुधरी मुचाकी उर्फ सोनी – पिता कोसा, उम्र 35 वर्ष, निवासी ग्राम एटेगट्टा, थाना एर्राबोर, जिला सुकमा।
- नोहर मरकाम – पिता हरिचंद, उम्र 36 वर्ष, निवासी ग्राम भूतबेड़ा, थाना शोभा, जिला गरियाबंद। आरोपी गरियाबंद जिले में नव आरक्षक के पद पर पदस्थ था।
टिफिन में छिपाकर रखे थे 21 लाख रुपये
पुलिस द्वारा आरोपियों के पास रखे काले बैग की तलाशी लेने पर टिफिन के अंदर 500-500 रुपये के नोट बरामद हुए। इनकी कुल राशि 21 लाख रुपये पाई गई।
पुलिस के अनुसार, मामले में प्रतिबंधित नक्सली गतिविधियों के पुनः संचालन के लिए आपराधिक षड्यंत्र तथा अवैध वसूली की रकम को इस्तेमाल करने के उद्देश्य से अपने कब्जे में रखने के साक्ष्य मिले हैं।
इन धाराओं में मामला दर्ज
मामले में थाना मैनपुर में अपराध क्रमांक 136/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(2), 61(2) तथा विधिविरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम (UAPA) की धारा 17, 18, 20, 38 एवं 40 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है।
पुलिस की इस कार्रवाई को नक्सल गतिविधियों से जुड़ी अवैध आर्थिक गतिविधियों पर महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है।
संपादकीय नोट: समाचार में आरोपियों के विरुद्ध पुलिस द्वारा दर्ज मामले और प्रेस नोट में दी गई जानकारी को आधार बनाया गया है। दोषसिद्धि न्यायालय द्वारा ही निर्धारित होगी।


