राज्य स्तरीय शिक्षक प्रतिभा सम्मान से सम्मानित हुए खोमन गुरुजी
केंद्रीय मंत्री तोखन साहू के करकमलों से मिला सम्मान, शैक्षणिक नवाचारों के जरिए छत्तीसगढ़ में बनाई विशिष्ट पहचान
फिंगेश्वर (गरियाबंद)। शासकीय प्राथमिक शाला सिर्रीखुर्द, संकुल छुईहा, विकासखंड फिंगेश्वर में पदस्थ राज्यपाल पुरस्कृत शिक्षक खोमन लाल सिन्हा (खोमन गुरुजी) को शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान, नवाचारपूर्ण शिक्षण पद्धति और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के प्रति समर्पण के लिए राज्य स्तरीय शिक्षक प्रतिभा सम्मान से सम्मानित किया गया। बिलासपुर में आयोजित गरिमामय समारोह में केंद्रीय मंत्री श्री तोखन साहू के करकमलों से उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया।
खोमन गुरुजी की इस उपलब्धि से विद्यालय परिवार सहित संकुल, विकासखंड और जिले के शिक्षा जगत में हर्ष एवं गौरव का माहौल है। उनकी यह उपलब्धि शिक्षा के प्रति निष्ठा, कर्तव्यपरायणता और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों का प्रतिफल है।
शैक्षणिक नवाचारों से बनाई विशिष्ट पहचान
खोमन गुरुजी अपने अभिनव शैक्षणिक प्रयोगों, रचनात्मक गतिविधियों और संस्कारयुक्त शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों की प्रतिभा निखारने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उनकी शिक्षण पद्धति में शिक्षा के साथ संस्कार, संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, रचनात्मकता और सामाजिक सरोकारों को विशेष महत्व दिया जाता है।
विद्यालय को आनंदमय, आकर्षक और ज्ञानवर्धक बनाने की दिशा में उनके द्वारा किए जा रहे नवाचारों ने उन्हें छत्तीसगढ़ में एक विशिष्ट पहचान दिलाई है।
उनका मानना है कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारियों, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का विकास भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से वे विभिन्न गतिविधियों एवं नवाचारों के माध्यम से बच्चों को सीखने के नए अवसर प्रदान कर रहे हैं।
अन्य शिक्षकों के लिए बने प्रेरणास्रोत
राज्य स्तरीय शिक्षक प्रतिभा सम्मान से सम्मानित होना खोमन गुरुजी के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि है। यह सम्मान उनके शैक्षणिक समर्पण और नवाचारपूर्ण कार्यों को मिली महत्वपूर्ण पहचान है। उनकी इस उपलब्धि से क्षेत्र के शिक्षकों, विद्यार्थियों और शिक्षा के प्रति समर्पित लोगों में उत्साह का संचार हुआ है।
खोमन गुरुजी की सफलता इस बात का उदाहरण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, सकारात्मक सोच, समर्पण और नवाचार के माध्यम से शासकीय विद्यालयों में भी गुणवत्तापूर्ण, संस्कारयुक्त एवं प्रभावशाली शिक्षा का वातावरण निर्मित किया जा सकता है।


