*पुरानी पेंशन देय तिथि से देने की मांग को लेकर तूता में शिक्षकों का सत्याग्रह, 5000 एलबी संवर्ग शिक्षक जुटे
*रायपुर, 2 अक्टूबर।* प्रदेश शिक्षक कल्याण संघ की एक सूत्रीय मांग – 1998 से सभी एलबी संवर्ग शिक्षकों को देय तिथि से सेवा गणना कर पुरानी पेंशन सहित सकल लाभ देने – को लेकर गांधी जयंती के दिन राजधानी के तूता धरना स्थल में सत्याग्रह आंदोलन का आगाज किया गया।
प्रदेश अध्यक्ष राजकिशोर तिवारी ने बताया कि संघ द्वारा लगातार प्रदेश के सभी मंत्री, विधायक, सांसद एवं शासन-प्रशासन को ज्ञापन दिया जाता रहा है, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
संघ का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट ने बोर्ड स्कूल शिक्षा विभाग एवं सतनाम सिंह व अन्य केस नंबर 6865/2022 में दिनांक 08.09.2026 के फैसले में स्पष्ट किया है कि जिनकी नियुक्ति 2004 के पूर्व हुई है, चाहे एडहॉक बेस पर ही क्यों न हो, भले ही उसे बार-बार निकाला गया हो और फिर लिया गया हो, उसे भी देय तिथि से सेवा गणना कर पुरानी पेंशन सहित सकल लाभ देना होगा। यह उसका अधिकार है।
संघ ने बताया कि उनकी नियुक्ति 1998-99 में शिक्षा विभाग द्वारा आवंटित पेंशन योग्य पदों पर की गई थी, 2001 में नियमितीकरण और 2018 में स्कूल शिक्षा विभाग में शासकीयकरण किया गया। 2004 के पूर्व पेंशन लागू था। 2004 के पूर्व नियुक्त सभी कर्मचारियों को नियुक्ति तिथि से पुरानी पेंशन सहित सकल लाभ दिया गया, सिर्फ हमें वंचित रखा गया है। केंद्रीय सिविल सेवा पेंशन नियम 1972 और छ.ग. सिविल सेवा पेंशन नियम 1976 के तहत देय तिथि से लाभ मिलना चाहिए।
तिवारी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सभी अधिकारी-कर्मचारी को पेंशन का लाभ दिया जा रहा है, फिर 98 से 2004 के पूर्व के एलबी संवर्ग शिक्षकों को क्यों वंचित किया जा रहा है, यह भारतीय संविधान की धारा 14 के प्रतिकूल है।
सत्याग्रह में प्रदेश भर से लगभग 5000 शिक्षक एकत्रित हुए। आंदोलन का संचालन उपाध्यक्ष दिनेश सिंह, सचिव नवीन चंद्राकर, महासचिव डेसनाथ पांडे, कार्यकारी अध्यक्ष नारायण सोनी सहित सभी संभागीय व जिला अध्यक्षों ने किया।


