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    सचिव राजेश सिंह राणा ने पीएम एकता मॉल का किया निरीक्षण, 31 दिसंबर तक पूर्ण करने के निर्देश; विश्वकर्मा पूजा में भी हुए शामिल

    श्रमिकों के साथ पूजा-अर्चना कर मनाया विश्वकर्मा दिवस, श्रमिकों ने राजकीय गमछा पहनकर की पूजा

    रायपुर। ग्रामोद्योग विभाग के सचिव एवं आईएएस अधिकारी राजेश सिंह राणा ने आज पीएम एकता मॉल के निर्माण स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण कार्य की प्रगति का जायजा लेते हुए संबंधित ठेकेदार और अधिकारियों से कार्य की स्थिति की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्य में तेजी लाते हुए 31 दिसंबर तक पीएम एकता मॉल का निर्माण कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।

    श्रमिकों के साथ विश्वकर्मा पूजा में हुए शामिल

    विश्वकर्मा दिवस के अवसर पर निर्माण स्थल पर श्रमिकों के साथ भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान निर्माण कार्य में जुटे श्रमिकों ने राजकीय गमछा पहनकर विश्वकर्मा पूजा में सहभागिता की। सचिव राजेश सिंह राणा भी श्रमिकों के साथ पूजा-अर्चना में शामिल हुए और उन्हें विश्वकर्मा दिवस की शुभकामनाएं दीं।

    निर्माण स्थल पर दिनभर मेहनत करने वाले श्रमिकों के साथ पूजा-अर्चना का यह दृश्य अपने आप में श्रम के सम्मान का भाव लिए रहा। जिन हाथों की मेहनत से किसी निर्माण को आकार मिलता है, उन्हीं श्रमिकों के साथ पूजा में शामिल होना इस अवसर को महज एक औपचारिक आयोजन से आगे ले गया।

    सचिव ने श्रमिकों से संवाद भी किया और निर्माण कार्य में उनकी भूमिका एवं योगदान को महत्व देते हुए उनकी सुविधाओं से जुड़ी जानकारी ली।

    समय पर भुगतान और गुणवत्ता पर भी जोर

    पूजा-अर्चना के बाद सचिव ने निर्माण कार्य की प्रगति, गुणवत्ता और श्रमिकों से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने ठेकेदार को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों को समय पर मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

    उन्होंने निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण कार्य पूरा करने पर जोर देते हुए कहा कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। साथ ही निर्माण से जुड़े सभी आवश्यक कार्यों को तय समय-सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए।

    श्रमिकों के सम्मान की सहज पहल

    विश्वकर्मा दिवस पर सचिव राजेश सिंह राणा का श्रमिकों के बीच पहुंचकर उनके साथ पूजा-अर्चना में शामिल होना एक भावपूर्ण पहल रही। निर्माण स्थल पर दिन-रात मेहनत करने वाले श्रमिकों के बीच पहुंचकर उनके साथ पूजा में शामिल होकर उन्होंने यह संदेश दिया कि किसी भी निर्माण की असली ताकत केवल मशीनों और संसाधनों में नहीं, बल्कि उसे आकार देने वाले मेहनतकश हाथों में भी होती है। श्रमिकों के सम्मान और उनके योगदान को इस सहज तरीके से महत्व देना निश्चित रूप से एक सकारात्मक और सराहनीय पहल रही।

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