भगवती लाल सेन लोकभाषा छत्तीसगढ़ी तथागत सम्मान 2025
भगवती लाल सेन लोकभाषा छत्तीसगढ़ी तथागत सम्मान डुमनलाल ध्रुव को दिल्ली की तथागत संस्था के संरक्षक, पूर्व आई.ए.एस.एवं वर्तमान में भारतीय शिक्षा बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. एन.पी. सिंह ने बताया कि संस्था द्वारा आयोजित ‘भगवती लाल सेन लोकभाषा छत्तीसगढ़ी तथागत सम्मान 2025’ सर्वसम्मति से डुमनलाल ध्रुव की कृति ‘मन के पाँखी’ को दिए जाने का निर्णय लिया गया है।
समिति के सदस्य डॉ भुवन सिंह ठाकुर, डॉ भारती मंडावी, डॉ. सियाराम साहू, संकल्प यदु ने प्रो. पीयूष कुमार की अध्यक्षता में सम्मान के लिए आई प्रविष्टियों में से डुमनलाल ध्रुव की कृति ‘मन के पाँखी’ का चयन किया। चयन समिति अध्यक्ष प्रो. पीयूष कुमार ने कहा डुमनलाल ध्रुव की कृति कहानी की शिल्पगत विशिष्टता से परिपूर्ण है। अपनी कहानियों के माध्यम से रचनाकार ने जीवन में देखे गए दृश्यों को पुनः देखा है जिसमें उन्होंने हाशिए के प्रश्नों को आंचलिकता की भावुक व्याख्या में न उलझाकर यथार्थ की भूमि में रचा है. उन्होंने छत्तीसगढ़ के जनजीवन के पारिवारिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवम् सामयिक प्रश्नों को अपने आसपास के दृश्यों एवम् सहज भावबोध में प्रसस्तुत किया है। इनकी यह कहानियां छत्तीसगढ़ के आंचलिक साहित्य के उज्ज्वल संभावनाओं का वाहक हैं जिनमें लोकल से ग्लोबल की महायात्रा विश्व मानव बनने की ओर अग्रसर होती है।
तथागत संस्था की ट्रस्टी श्रीमती जिज्ञासा सिंह राणा ने इस अवसर पर यह बताया कि सम्मान समारोह 11 मई को रायपुर में आयोजित होगा, जिसके मुख्य अतिथि अध्यक्ष विधानसभा माननीय डॉ रमन सिंह, छत्तीसगढ़ होंगे।
सम्मान के संयोजक प्रो. पीयूष कुमार तथा तथागत संस्था सम्मान समिति की राष्ट्रीय संयोजक डॉ. सोनी पाण्डेय ने इसे छत्तीसगढ़ी साहित्य के विकास में मील का पत्थर बताते हुए जानकारी दी कि संस्था श्री डुमनलाल ध्रुव को 51 हजार नगद, अंगवस्त्रम् तथा स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित करेगी।


