शिक्षकों के सच्चाई की हुई जीत :
राज्य शासन के दोषपूर्ण वेतनमान से न्यायालय से मिलेगा निजात
बुढ़ापे का सहारा पेंशन भी होगा बहाल – शिव सारथी
बिलासपुर – कहा जाता हैं कि सत्य परेशान हो सकता हैं पराजित नहीं इस कहावत को चरितार्थ किया है मैडम सोना साहू और उसके पति रामनिवास साहू ने जो काम लाखों संख्या बल का दम भरने वाले बड़े बड़े दिग्गज शिक्षक नेता नहीं कर पाए वह कर दिखाया है सोना साहू ने कहा जाता हैं उच्च न्यायालय के जज के सामने अच्छे से अच्छे वकील की बोलती बंद हो जाता है पर भाई और मेरे विधिक साथी रामनिवास साहू ने जिस विधिक तैयारी और निर्भीक होकर माननीय उच्च न्यायालय के डिविजन बैंच में अपने तर्कों को रखा न्यायाधीश भी हम शिक्षकों के प्रशासनिक शोषण और गुमराहपूर्ण दिए जा रहे वेतनमान को भलीभांति जान समझकर हमें इंसाफ दे दिए।
यह कथन है छग सहायक शिक्षक फेडरेशन के संस्थापक पंजीयनकर्ता शिक्षक नेता शिव सारथी का उन्होंने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए आगे कहा है कि वो हमेशा से जब तक सहायक शिक्षक फेडरेशन में बतौर संचालक रहे सहायक शिक्षकों के वेतनमान सुधार के लिए सड़क की लड़ाई के साथ साथ न्यायालयीन लड़ाई लड़ने का भी पुरजोर वकालत किया था पर प्रदेश अध्यक्ष मनीष मिश्रा ने इसे सिरे से खारिज करके न्यायालय के प्रति अविश्वास जताया और उसके विरुद्ध जो भी वैधानिक कार्यक्रम बनाया उसे अपने वर्चस्व के लिए सहायक शिक्षक फेडरेशन से अलग करता गया और आज जाकर उसी न्यायालय के माध्यम से सोना साहू और रामनिवास साहू के माध्यम से शिक्षकों को इंसाफ दिलाने का गीत गाया फिर रहा है। खैर जो भी है देर से सही मनीष मिश्रा को भारतीय संविधान और न्यायालय के इंसाफ के ताकत का पता चल गया और वो न्यायालय के माध्यम को अपनाकर अपने गलती को सुधार लिया है पर जरूरत है सोना साहू जी के माध्यम से बाकी तमाम शिक्षकों को न्याय दिलाने का इसके लिए शिक्षक नेता शिव सारथी ने प्रदेश भर के संवैधानिक और नियमों के जानकार नेताओं का एक पैनल बनाकर आगे की लड़ाई लड़ने का फैसला किया है ताकि प्रदेश के शिक्षक नेतागिरी के भंवरजाल से बचे रहे।
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