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कर्मचारियों को मार्च से केवल 3% मंहगाई भत्ता : छग बजट से कर्मचारी हुए निराश, पुरानी सेवा गणना,लंबित,वेतन विसंगति दूर करने,कैशलेश चिकित्सा व पूर्ण पेंशन प्रदाय करने की थी आस- शालेय शिक्षक संघ

शिक्षक,कर्मचारियों को उपेक्षित रखकर सुशासन की बात बेमानी, कर्मचारी होते है शासन की धुरी,जो हैं हलाकान, बजट में रखना था सबका ध्यान – वीरेंद्र दुबे

रायपुर।  छग के इस बजट प्रदेश के शिक्षकों और कर्मचारियों को बड़ी निराशा हुई है,क्योंकि उनके लिए मार्च 2025 से 3% मंहगाई भत्ते के अतिरिक्त कोई घोषणा नही की गई, बजट से लाभान्वित होने वालों में उनका कोई स्थान नही है, जबकि प्रदेश के शिक्षको व कर्मचारियों ने विष्णुदेव सरकार से बड़ी आस लगा रखी थी जिनमे प्रमुख रूप से संविलियन प्राप्त शिक्षको की पुरानी सेवा गणना, क्रमोन्नति, देय तिथि से मंहगाई भत्ता व उसका एरियर्स, वेतन विसंगति दूर करने, कैशलेस चिकित्सा, पूर्ण पेंशन प्रदान करने जैसी महत्वपूर्ण मांगे रही,जिन पर इस बजट में कोई निर्णय नही लिया गया। छग शालेय शिक्षक संघ ने इसे शिक्षकों व कर्मचारियों के लिए निराशाजनक बजट बताया है।

शालेय शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने कहा कि बजट समावेशी होना चाहिए था, कमर्चारी शासन की रीढ़ होते है, ऐसे में इस बजट में उनकी उपेक्षा करना बेमानी है,शिक्षकों और कर्मचारियों ने साय सरकार से बड़ी उम्मीदें लगा रखी थी किंतु छग बजट के प्रस्तुत होते ही, बजट में कर्मचारियों के लिए न कोई योजना, न कोई घोषणा की गई जिससे शिक्षक व कर्मचारी उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

शालेय शिक्षक संघ के महासचिव धर्मेश शर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी व प्रदेश मीडिया प्रभारी जितेंद्र शर्मा ने कहा कि संविलियन प्राप्त शिक्षक अपनी बहुप्रतीक्षित मांग पुरानी सेवा गणना कर क्रमोन्नति, पूर्ण पेंशन, कैशलेश चिकित्सा, वेतन विसंगति दूर करने की बाट जोह रहे थे पर इस बजट में इन मांगों पर कोई ध्यान नही दिया गया है इसी तरह प्रदेश का हर कर्मचारी अपनी लंबित DA व उसके मंहगाई भत्ते को देय तिथि से केंद्र के बराबर किये जाने की प्रतीक्षा कर रहे थे उसमें भी सभी के हाथ निराशा लगी है। साय सरकार को सभी का ध्यान रखना चाहिए, बजट समावेशी होना चाहिए, पर कर्मचारियों को कुछ भी नही मिला।