आठ साल में फेडरेशन की उपलब्धि शून्य, आंदोलन के नाम पर सिर्फ भीड़ इक्कठा हुआ, परिणाम कुछ नहीं….
केदार, संजय, वीरेंद्र एवं विकास सहित पुराने नेताओं पर ही भरोसा…..
पुनरीक्षित वेतन, संविलयन सहीत अनेकों लाभ इन्हीं नेताओं ने दिलाया, ओल्ड इज गोल्ड – जाकेश साहू
रायपुर //-
छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन (छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक फेडरेशन) के संस्थापक तथा छत्तीसगढ़ जागरूक शिक्षक संघ, पंजीयन क्रमांक 122202595034 के प्रांताध्यक्ष जाकेश साहू ने प्रदेश के 1,80,000 शिक्षकों (शिक्षक एलबी संवर्ग) के नाम लिखित संबोधन जारी करते हुए कहा है कि विगत 8 सालों में प्रदेश के शिक्षकों की कोई भी मांगे पूरी नहीं होने के लिए छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन एवं उनका शीर्ष नेतृत्व जिम्मेदार है।
जाकेश साहू ने कहा है कि विगत 2017 में संविलियन हेतु राज्य में बड़ा आंदोलन हुआ। जिसका नेतृत्व प्रदेश में शिक्षकों के बड़े, पुराने एवं अनुभवी शिक्षक नेताओं केदार जैन, संजय शर्मा, वीरेंद्र दुबे एवं विकास राजपूत सहित अन्य लोगों ने किया था। वह आंदोलन प्रदेश का ऐतिहासिक व अभूतपूर्व आंदोलन रहा था। प्रदेश के तात्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह उस समय यह कहा करते थे कि शिक्षकों का संविलियन ना तो कभी हुआ है और ना ही कभी होगा।
लेकिन इन पुराने शिक्षक नेताओं के दमदार और परिणाम मूलक आंदोलन की बदौलत शिक्षकों को संविलियन जैसी एक महत्वपूर्ण, अभूतपूर्व, ऐतिहासिक एवं बड़ी सौगात मिली थी। इसके पूर्व में भी 2013 में इन्हीं नेताओं के नेतृत्व में प्रदेश में बड़ा शिक्षक आंदोलन हुआ था, जिसमें प्रदेश के शिक्षकों को नियमित शिक्षकों के समतुल्य एवं छठवां वेतनमान दिया गया था। ठीक इसके पहले 2011 में भी इन्हीं शिक्षक नेताओं के नेतृत्व में “शिक्षाकर्मी फेडरेशन” बनाकर बहुत बड़ा प्रदेश स्तरीय आंदोलन राजधानी में किया गया था।
जिसमें छत्तीसगढ़ राज्य की तात्कालीन भाजपा सरकार ने रातों-रात एक साथ लगभग 11 आदेश जारी किए थे। इस प्रकार संजय शर्मा, वीरेंद्र दुबे, केदार जैन एवं विकास राजपूत सहित अन्य कर्मचारी नेताओं के सफल नेतृत्व में प्रदेश में कई अनेकों आंदोलन हुए तथा प्रदेश की शिक्षकों को विगत 1995 में जो 500 रुपए महीने से वेतन की शुरुआत हुई थी वह आज 30, 40, 50, 60, 70, 80 हजार और लगभग एक लाख रुपए तक के आसपास वेतन मिल रहा है। यह सब पुराने नेताओं के नेतृत्व में लड़े गए सफल और अभूतपूर्व आंदोलनो से मिला है।
वहीं दूसरी ओर 2018 में हमने वेतन विसंगति के नाम पर प्रदेश के सहायक शिक्षकों को एक मंच पर लाया और आंदोलन की शुरुआत की। तात्कालिन छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक फेडरेशन का निर्माण इन नेताओं पर दबाव बनाने एवं सहायक शिक्षकों की मांगों को उठाने के लिए तात्कालीन तौर पर किया गया था, ना कि एक अलग से संगठन बनाकर नेतागिरी का मंच बनाने के लिए।
बाद में कुछ महत्वाकांक्षी तिकड़मी लोगों ने सहायक शिक्षकों की एक बड़ी संख्या को एक संगठन विशेष में बांधकर नेतागिरी का मंच बनाया। संस्थापक सदस्यों को षड्यंत्रपूर्वक बाहर किया और विगत 8 साल तक लोगों से संघर्ष/क्रमोन्नति/विसंगति के नाम पर बार बार चंदा वसूली किया एवं आंदोलन के नाम पर बार-बार राजधानी रायपुर बुलाया गया।
आंदोलन भी किया गया मगर उक्त आंदोलन में सफल व परिणाम मूलक नेतृत्व का अभाव रहा। इन नौ सीखिए नेताओं ने सही नेतृत्व एवं परिणामदायक आंदोलन नहीं किया। जिसके कारण विगत 8 सालों से प्रदेश के समस्त सहायक शिक्षको सहित अन्य सभी शिक्षक अपनी मूल मांगो की पूर्ति के लिए भटक रहे है।
शिक्षक नेता एवं फेडरेशन के संस्थापक जाकेश साहू ने प्रेस विज्ञप्ति एवं लिखित संदेश में आगे कहा है कि प्रदेश के शिक्षक साथियों को अब यह विचार करने की जरूरत है की हमें शिक्षकों की मांगों, शिक्षक संगठनों एवं माँगो के लिए होने वाले एवं हो चुके आंदोलनों पर तुलनात्मक अध्ययन करने की जरूरत है। 8 साल बनाम विगत बाकी के वर्ष में फेडरेशन के नए नेताओ बनाम शिक्षाकर्मियों/शिक्षकों के पुराने नेताओ इन दोनों का तुलनात्मक अध्ययन से यह स्पष्ट होता है की पुराने नेताओं (संजय, वीरेंद्र, केदार, विकास एवं अन्य) के लीडरशिप में ही हमें आर्थिक लाभ हुआ। पुनरीक्षित वेतनमान मिला। 2011 में एक साथ 11 आदेश निकलवाए गए। 2018 में संविलयन मिला।
वहीं दूसरी ओर फेडरेशन की उपलब्धि अब तक पूरी तरह लगभग शून्य रही है। ऐसे में हमें सोचने पर एवं विचार करने पर मजबूर होना पड़ रहा है कि शिक्षकों के पुराने नेताओं की लीडरशिप कारगर एवं परिणाम दायक रही है।
अतः शिक्षक नेता जाकेश साहू ने प्रदेश के समस्त 1,80,000 शिक्षकों से अपील की है की हमें हमारे पुराने नेताओं के संगठन को ही हमें ज्वाइन करते हुए सदस्य बनने चाहिए। साथ ही शिक्षकों के आंदोलन की सारी कमान इन्हीं पुराने नेताओं संजय शर्मा, वीरेंद्र दुबे, केदार जैन, विकास राजपूत सहित अन्य सभी साथियों को सौपा जाना चाहिए। तथा प्रदेश के सभी शिक्षक संगठनों का एक मंच/समिति/मोर्चा बनाकर शिक्षकों की प्रथम सेवा गणना करते हुए, वेतन संगति दूर कर, क्रमोन्नति देने, प्रथम सेवा का गणना करते हुए पुरानी पेंशन सहित समस्त लाभ देने। टीईटी (टेट) की बाध्यता को रद्द करने हेतु आंदोलन किया जाना चाहिए। जिससे शिक्षकों की मांगे पूरी होगी।
अतः हमें सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन के नेताओं एवं नेतृत्व से बचकर रहना होगा।क्योंकि उक्त संगठन ने विगत 8 सालों से न तो कोई परिणाम दिलाया पाया और न ही कोई मांगे पूरी करवा पाई।


