80 हजार सेवारत शिक्षकों की परीक्षा लेना अमानवीय, 50+ उम्र में योग्यता साबित करने की बाध्यता पर शिक्षक नेता इदरीश खान ने उठाए सवाल
बोले– वर्षों तक शिक्षा विभाग को सेवाएं देने वाले शिक्षकों को इस उम्र में परीक्षा के मानसिक दबाव में डालना उचित नहीं, सरकार शिक्षकों की पीड़ा समझे और राहत प्रदान करे।
छत्तीसगढ़। प्रदेश में कार्यरत गैर-TET शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। परीक्षा का पाठ्यक्रम जारी होने और दिसंबर-जनवरी में परीक्षा आयोजित करने की विभागीय तैयारी के बीच अब शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी अपनी नाराजगी जाहिर करनी शुरू कर दी है।
इसी कड़ी में शिक्षक नेता इदरीश खान ने लगभग 80 हजार सेवारत शिक्षकों को TET परीक्षा की प्रक्रिया से गुजरने को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे शिक्षकों के प्रति अमानवीय बताते हुए कहा कि वर्षों तक शिक्षा विभाग में अपनी सेवाएं देने वाले शिक्षकों को 50 वर्ष से अधिक की उम्र में दोबारा अपनी योग्यता साबित करने के लिए परीक्षा देने को बाध्य करना उचित नहीं है।
80 हजार शिक्षकों पर परीक्षा का दबाव अमानवीय
शिक्षक नेता इदरीश खान का कहना है कि प्रदेश में हजारों शिक्षक ऐसे हैं, जिन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा बच्चों को शिक्षा देने में समर्पित कर दिया। वर्षों की सेवा और शिक्षण अनुभव के बावजूद अब उन्हें TET परीक्षा की तैयारी करने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
उनका सवाल है कि जो शिक्षक 50 वर्ष से अधिक की उम्र पार कर चुके हैं, जिन्होंने दशकों तक विद्यालयों में अध्यापन किया है, उनसे इस उम्र में दोबारा परीक्षा लेकर योग्यता साबित करने की अपेक्षा करना कहां तक व्यावहारिक और मानवीय है?
“अब अध्ययन करने की स्थिति में नहीं हैं शिक्षक”
TET परीक्षा को लेकर वरिष्ठ शिक्षकों की पीड़ा सामने आने लगी है। शिक्षकों का कहना है कि नियमित अध्यापन कार्य, पारिवारिक जिम्मेदारियों और लंबे सेवाकाल के बाद अब दोबारा प्रतियोगी परीक्षा जैसी तैयारी करना आसान नहीं है।
एक सेवारत शिक्षक ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि वे इस परीक्षा सिस्टम की कड़ी निंदा करते हैं। अब वे अध्ययन करने की स्थिति में नहीं हैं। इस उम्र में परीक्षा देना किसी मानसिक शोषण से कम नहीं है।
CBT परीक्षा ने बढ़ाई चिंता
विभागीय निर्देश के अनुसार कार्यरत गैर-TET शिक्षकों के लिए निजी तकनीकी सेवा प्रदाता कंपनी के माध्यम से कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया है।
इस व्यवस्था को लेकर भी वरिष्ठ शिक्षकों के बीच चिंता है। लंबे समय से शिक्षण कार्य कर रहे कई शिक्षकों के लिए कंप्यूटर आधारित परीक्षा की तैयारी एक अतिरिक्त चुनौती बन सकती है।
सरकार से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील
शिक्षक नेता इदरीश खान ने शिक्षकों की परिस्थितियों, उम्र और वर्षों के सेवाकाल को ध्यान में रखते हुए राहत देने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
शिक्षकों का कहना है कि उनकी सेवाओं और अनुभव को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। सरकार को ऐसा रास्ता निकालना चाहिए, जिससे वर्षों तक शिक्षा व्यवस्था में योगदान देने वाले शिक्षकों को अनावश्यक मानसिक दबाव का सामना न करना पड़े।
अब सरकार की ओर टिकी शिक्षकों की निगाहें
TET परीक्षा को लेकर प्रदेश में दो तरह की परिस्थितियां दिखाई दे रही हैं। एक ओर विभाग परीक्षा आयोजन की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सेवारत शिक्षक अपनी उम्र, अनुभव और सेवाकाल को आधार बनाकर राहत की मांग कर रहे हैं।
अब सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार 80 हजार शिक्षकों की इस चिंता को गंभीरता से लेते हुए कोई राहत का रास्ता निकालेगी? क्या वरिष्ठ शिक्षकों के अनुभव और लंबे सेवाकाल को ध्यान में रखकर कोई वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाएगी?
शिक्षक नेता इदरीश खान द्वारा उठाया गया यह मुद्दा अब सेवारत शिक्षकों के सम्मान, अनुभव और भविष्य से जुड़ी महत्वपूर्ण बहस का विषय बनता जा रहा है।साथही उचित फोरम इस पर पुनर्विचार कर राहत दे।
दखल छत्तीसगढ़
निष्पक्ष बेबाक निर्भीक


