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    एससीईआरटी की शिकायत राज्य के महामहिम राज्यपाल एवं माननीय मुख्यमंत्री से…..
    संबंधित संस्थान द्वारा बैठक बुलाने में शिक्षक संगठनों के साथ की गई भेदभाव …….

    रायपुर //-
    एससीईआरटी अर्थात राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद द्वारा सेवारत शिक्षकों के लिए ब्रिज कोर्स के निर्धारण हेतु सुझाव आमंत्रण विषय पर विभाग के विभिन्न संस्थानो के प्रमुखों, उनके प्रतिनिधियों, विभिन्न महाविद्यालय के प्राचार्यों सहित छत्तीसगढ़ प्रदेश में कार्यरत शिक्षकों के विभिन्न पंजीकृत संगठनों के प्रांत अध्यक्षों की बैठक बुलाई गई थी।
    परंतु उक्त बैठक में सिर्फ चुनिंदा प्रदेश अध्यक्ष एवं उनके संगठनों को आमंत्रण दी गई थी। संबंधित लोगों के नाम से यह पत्र जारी किया गया है। परंतु प्रदेश के अनेक ऐसे पंजीकृत संगठन है जो शिक्षको के हित में लगातार काम कर रहे हैं।
    उन्हें उक्त बैठक में नहीं बुलाया गया। छत्तीसगढ़ जागरूक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष जाकेश साहू ने संबंधित मामले की शिकायत राज्य के महामहिम राज्यपाल एवं माननीय मुख्यमंत्री महोदय को लिखित रूप में पत्र प्रेषित की है।
    प्रदेश अध्यक्ष जाकेश साहू ने कहा कि एनसीईआरटी द्वारा किसी भी विषय के बैठक बुलाने से पहले उनको यह जानकारी जुटाई जानी चाहिए थी कि प्रदेश में कितने शिक्षक संगठन पंजीकृत हैं…???? उन सभी को बैठक में बुलाया जाना चाहिए था।
    परंतु उक्त बैठक के आमंत्रण में भेदभाव बरती गई। प्रांत अध्यक्ष जाकेश साहू ने उक्त विषय पर काफी नाराजगी जताते हुए कहा कि इस प्रकार का भेदभाव किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने पत्र के माध्यम से राज्य के महामहिम राज्यपाल एवं माननीय मुख्यमंत्री महोदय से संबंधित पत्र के जारी होने के संबंध में विभिन्न विषयों पर जांच एवं संबंधित उच्च अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
    उन्होंने सवाल किया है कि यह पत्र किसके द्वारा जारी की गई…??? किस आधार पर जारी की गई..???? जिनका नाम शामिल किया गया उसको किस आधार पर शामिल किया गया..???? और जिन संगठनों को छोड़ा गया उनको किस आधार पर छोड़ा गया …????
    अब देखना यह है कि इस विषय पर कोई कार्रवाई होती है अथवा नहीं या फिर इस पत्र को ठंडे बस्ते में डालकर मामले को रफा दफा करते हुए दोषी अधिकारीयो को बचाया जाएगा या फिर उस पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
    प्रांत अध्यक्ष जाकेश साहू ने कहा कि यदि संबंधित अधिकारी के ऊपर विभागीय कार्रवाई अथवा जांच नहीं हुई तो इस मामले को लेकर वे माननीय हाई कोर्ट में याचिका दायर करेंगे लेकिन शिक्षक संगठनों के साथ भेदभाव किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। क्योंकि सभी शिक्षक संगठन शिक्षकों के हित में प्रदेश स्तर पर लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसे में सरकार के एक कार्यालय द्वारा उनके साथ भेदभाव किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।

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