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छत्तीसगढ़ में विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) ऐप को लेकर शिक्षकों का यह विरोध सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर “CG Viral News” बन चुका है। गरियाबंद जिले के इस वायरल आवेदन पत्र को सोशल मीडिया रील, पोस्ट या वायरल न्यूज़ फॉर्मेट में इस प्रकार प्रस्तुत किया जा सकता
  • विजुअल (Visual): स्क्रीन पर गरियाबंद के प्रधानपाठक इदरीश मोहम्मद खान का वायरल पत्र और पीछे छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (WPC No. 709/2026) की प्रतीकात्मक इमेज।
  • बैकग्राउंड म्यूजिक: सस्पेंस/ब्रेकिंग न्यूज़ टोन।
“छत्तीसगढ़ के शिक्षा जगत से इस वक्त की सबसे बड़ी वायरल खबर! गरियाबंद जिले में शासकीय प्राथमिक शाला महेंद्रगढ़ के प्रधानपाठक ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी को पत्र सौंपकर VSK App का इस्तेमाल करने से साफ मना कर दिया है।”
“शिक्षकों का कहना है कि वे अपने निजी पैसों से खरीदे गए मोबाइल का उपयोग शासकीय काम के लिए नहीं करेंगे। ऐप डाउनलोड करने से उनकी निजी प्राइवेसी खतरे में है और वित्तीय साइबर फ्रॉड की पूरी आशंका है! शिक्षकों ने दो टूक कहा है— अगर सरकार को काम कराना है, तो शासकीय टैबलेट या मोबाइल उपलब्ध कराए, वरना जबरदस्ती करने पर वे दोबारा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे!”

शासकीय प्राथमिक शाला महेंद्रगढ़ के प्रधानपाठक ने ‘विद्या समीक्षा केंद्र’ ऐप पर उठाए गंभीर सवाल!## 📌 मुख्य बिंदु (Bulletins):

* निजी मोबाइल पर ऐप चलाने से साफ इंकार: प्रधानपाठक इदरीश मोहम्मद खान ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी को सौंपा पत्र; कहा—”निजी मोबाइल पर सपोर्ट नहीं कर रहा है VSK App।”
* प्राइवेसी और साइबर फ्रॉड का बड़ा खतरा: पत्र में दावा— ऐप इंस्टॉल करने से व्यक्तिगत गोपनीयता भंग होने और वित्तीय साइबर अपराध घटित होने की पूरी आशंका।
* शासकीय डिवाइस की मांग: शिक्षकों ने साफ कहा कि यदि सरकार इस ऐप पर काम कराना चाहती है, तो शासकीय रूप से मोबाइल या टैबलेट उपलब्ध कराए।
* हाईकोर्ट केस का हवाला: न्यायालय में पहले से ही साथी कमलेश सिंह बिसेन द्वारा दायर प्रकरण (WPC No. 709/2026) लंबित।
* न्यायालय जाने की सख्त चेतावनी: शिक्षकों पर किसी भी प्रकार की जबरदस्ती या प्रशासनिक सख्ती होने पर आवेदक दोबारा कोर्ट जाने को बाध्य होगा।


📰 वायरल पोस्ट कंटेंट (WhatsApp और Facebook के लिए)

🚨 छत्तीसगढ़ शिक्षक बनाम VSK App: प्राइवेसी और साइबर ठगी का बढ़ा डर! 🚨
  • कहां का है मामला?: गरियाबंद जिला, छत्तीसगढ़।
  • किसने उठाई आवाज?: इदरीश मोहम्मद खान (प्रधानपाठक, शासकीय प्राथमिक शाला महेंद्रगढ़)।
  • क्या है पूरा विवाद?: शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों को अपने निजी फोन पर ‘विद्या समीक्षा केंद्र’ (VSK) ऐप इंस्टॉल कर उपस्थिति और डेटा एंट्री करने का दबाव बनाया जा रहा है।
  • शिक्षकों की 3 बड़ी आपत्तियां:
    1. निजता का उल्लंघन (Privacy Leak): निजी मोबाइल में शिक्षकों का पर्सनल डेटा, तस्वीरें और जरूरी जानकारियां होती हैं, जो ऐप के जरिए लीक हो सकती हैं।
    2. साइबर फ्रॉड की आशंका: ऐप डाउनलोड होने के बाद साइबर ठगी से जुड़े कॉल आने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
    3. नियमों का हवाला: सिविल सेवा आचरण नियम 1965 में ऐसा कोई नियम नहीं है जो निजी संपत्ति (स्मार्टफोन) के शासकीय उपयोग को अनिवार्य बनाए।
  • हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: मामले को लेकर शिक्षक कमलेश सिंह बिसेन द्वारा दायर याचिका (WPC No. 709/2026) पर हाईकोर्ट पहले ही ऐप इंस्टॉल करने की अनिवार्यता और अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक लगा चुका है।
💬 शिक्षकों का साफ संदेश: “यदि विभाग काम कराना चाहता है, तो स्कूल स्तर पर बायोमेट्रिक मशीन या शासकीय डिवाइस (टैबलेट/मोबाइल) उपलब्ध कराए, निजी फोन का इस्तेमाल नहीं होगा।”

यह खबर इस समय छत्तीसगढ़ के सभी शिक्षक संगठनों और सोशल मीडिया ग्रुप्स में तेजी से वायरल हो रही है।

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