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    सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन अब सहायक शिक्षको का हितैषी नही रहा _मोर्चा

    टीचर्स पदोन्नति संघर्ष मोर्चा कांकेर जिला संयोजक महेश्वर कोटपरिया ने फेडरेशन जिला अध्यक्ष निर्भय कोवाची के अधिकृत जारी बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि सहायक/समग्र शिक्षक फेडरेशन कांकेर
    द्वारा 8 दिसंबर के प्रस्तावित जिला स्तरीय धरना-प्रदर्शन से दूरी बनाने और आंदोलन को “अनावश्यक” बताने संबंधी प्रेस-नोट पर टीचर्स पदोन्नति संघर्ष मोर्चा अपनी स्पष्ट प्रतिक्रिया जारी करता है।

    1️⃣ संघर्ष का उद्देश्य बहकावा नहीं – अधिकार है

    फेडरेशन द्वारा यह कहना कि “अन्य संघों के बहकावे में न आएँ” अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
    शिक्षक बहकाए नहीं जाते—
    शिक्षक अपने हक के लिए आवाज उठाते हैं।
    8–10 वर्षों से पदोन्नति की फाइलें लटकती रहें, पत्राचार होते रहें और वास्तविक परिणाम शून्य रहे—
    तो संघर्ष स्वाभाविक है, “बहकावा” नहीं।

    2️⃣ केवल पत्र जारी होने से प्रक्रिया पूर्ण नहीं मानी जाती

    फेडरेशन ने 27 नवंबर के पत्राचार को “प्रगति” बताया है।
    हम कहना चाहते हैं—
    सिर्फ पत्रों से पदोन्नति नहीं मिलती, आदेश चाहिए।
    सैकड़ों शिक्षकों की पदोन्नति 8–10 वर्षों से लंबित है।
    अगर प्रक्रिया वास्तव में पूरी होने वाली होती,
    तो शिक्षक सड़क पर आने को मजबूर नहीं होते।

    3️⃣ संवाद की कोशिशें तभी सार्थक, जब परिणाम निकलें

    संवाद और वार्ता निश्चित रूप से सर्वोत्तम उपाय हैं,
    लेकिन जब महीनों–सालों की वार्ता केवल आश्वासनों में सिमट जाए,
    तो संवेदनशील, शांतिपूर्ण दबाव लोकतांत्रिक अधिकार बन जाता है।

    टीचर्स पदोन्नति संघर्ष मोर्चा ने तीन-सूत्रीय मांगों पर अंतिम अल्टीमेटम दिया,
    परंतु न समय सीमा का पालन हुआ, न बैठक के लिए बुलाया गया।

    4️⃣ आंदोलन से दूरी बनाना फेडरेशन का अधिकार, पर इसकी आलोचना अनुचित

    किसी भी संगठन को आंदोलन का समर्थन न करना उसका अधिकार है।
    लेकिन आंदोलन को गलत साबित करना या शिक्षकों को “भ्रमित” कहना उचित नहीं।
    संघर्ष मोर्चा किसी संगठन के खिलाफ नहीं—
    व्यवस्था की उस देरी के खिलाफ है, जिसने हजारों शिक्षकों का कैरियर रोक रखा है।

    5️⃣ यह आंदोलन शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और परिणामोन्मुख है

    न टकराव चाहते हैं, न राजनीति।
    मांगें स्पष्ट हैं—
    समयबद्ध पदोन्नति प्रक्रिया, लंबित प्रकरणों का निराकरण और पारदर्शिता।

    अगर प्रशासन समय सीमा में आदेश जारी कर देता,
    तो आंदोलन की आवश्यकता ही न पड़ती।

    6️⃣ अंत में—एकजुटता की अपील, विभाजन की नहीं

    हम सभी शिक्षक एक ही परिवार के सदस्य हैं।
    अलग-अलग सोच और रणनीतियाँ हो सकती हैं,
    लेकिन लक्ष्य एक ही है—पदोन्नति और सम्मान।
    हम फेडरेशन का भी सम्मान करते हैं,
    पर उनसे अपेक्षा करते हैं कि वे शिक्षकों की एकजुटता को कमजोर करने वाले शब्दों से बचें।

    ✊ संघर्ष मोर्चा का संदेश स्पष्ट है

    “हम परिणाम आने तक शांत नहीं बैठेंगे।
    और न किसी के दबाव में आंदोलन वापस लेंगे।”

    8 दिसंबर का जिला स्तरीय शांतिपूर्ण धरना–प्रदर्शन केवल एक कदम है—
    अधिकारों की प्राप्ति की दिशा में।
    अंतिम में श्री मान जो सहायक शिक्षको की हित की बात करेगा लड़ेगा चाहे कोई भी संघ संगठन हो मैं हमेशा उनके साथ रहूँगा । एकबात और जब से यह ग्रुप बना था तब से आज तक मैं इस ग्रुप में एडमिन बना रहा आज मुझे इस ग्रुप का एडमिन से हटा दिया गया है अब यह भी संभव है की बहुत जल्द इस ग्रुप से मुझे रिमूव भी कर दिया जाए.मगर जो सच है वो सच है बॉस ।

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