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*अंबिकापुर।* यह किसी फिल्म की कहानी नहीं, हकीकत है। त्याग और समर्पण की मिसाल बनकर शिक्षा विभाग में जीवन के 30 साल देने वाले एक प्रधानपाठक आज सेवानिवृत्ति के बाद मजदूरी कर अपना गुजारा करने को मजबूर हैं। यह तस्वीर सरकारी कर्मचारियों की वर्तमान पेंशन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

1995-96 में तत्कालीन मध्यप्रदेश सरकार ने पंचायत विभाग के माध्यम से सहायक शिक्षक, शिक्षक और व्याख्याता के पदों पर जो भर्ती की थी, जिन कर्मचारियों ने अपना पूरा जीवन बच्चों को शिक्षा देने में समर्पित कर दिया, आज वे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।

*62 साल की उम्र में मजदूरी करने को मजबूर*

सेवानिवृत्त प्रधानपाठक ने बताया कि 1998 में उन्हें पूर्णतः शिक्षक के रूप में नियुक्त किया गया था। तीन साल की परिवीक्षा के बाद उनका नियमितीकरण किया गया। इसके बाद उन्होंने 30 वर्षों तक ईमानदारी और निष्ठा के साथ बच्चों को शिक्षा दी और 2025 में प्रधानपाठक के पद से सेवानिवृत्त हुए। अब वे अपनी रोजी-रोटी के लिए मजदूरी कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि वर्ष 1995-96 से 2025 तक यानी 30 साल की सेवा में वे सरकार की 6 पंचवर्षीय योजनाओं में भागीदार बने, चुनाव ड्यूटी से लेकर ग्रामीण अंचल के हर कार्य में सहयोग दिया। राष्ट्र निर्माण का शिक्षक आज 62 वर्ष के बाद भी मजदूरी करने के लिए विवश है।

*1998 से 2004 के हजारों शिक्षकों पर संकट*

सेवानिवृत्त प्रधानपाठक का कहना है कि एक ओर हर विभाग के कर्मचारियों को पेंशन मिल रही है, वहीं 1998 से 2004 के पूर्व के शिक्षक मजदूरी करने के लिए मजबूर हैं। यह स्थिति आने वाले समय में अन्य हजारों शिक्षकों की होने वाली है।

यदि पुरानी पेंशन लागू नहीं हुई तो 80-90 हजार कर्मचारी जिले के बाद रिटायरमेंट पर मात्र 2-3 हजार की न्यूनतम पेंशन में जिएंगे, जबकि ये शिक्षक 2004 के पूर्व के हैं, जब पुरानी पेंशन लागू थी। 2004 के बाद एनपीएस लागू कर दिया गया।

*धरना देकर कहा – जागो साथियों, अभी समय है*

उन्होंने 1998-99 से 2004 के पूर्व के शिक्षकों से एकजुट होने और समय रहते अपनी आवाज उठाने की अपील की है। उनका कहना है कि अभी समय है, बाद में बचाने से कुछ नहीं होगा, जब पूरी पुरानी पीढ़ी इस समस्या से गुजर चुकी होगी। अन्याय के खिलाफ न्याय की लड़ाई जारी रहेगी।

पुरानी पेंशन बहाली और टेट परीक्षा से मुक्ति की मांग को लेकर प्रदेश शिक्षक कल्याण संघ ने 2 अक्टूबर को तुता मैदान रायपुर में धरना भी दिया और दो टूक कहा कि संघर्ष में साबित नहीं टिकेंगे, खाली की भूमिका बदलेगी। वे बिना प्रचार के शिक्षकों के हितों की लड़ाई में साथ खड़े रहते हैं।

सेवानिवृत्त प्रधानपाठक ने कहा कि यदि 2018 में शासन ने पुरानी पेंशन लागू की होती तो आज उन्हें मजदूरी नहीं करनी पड़ती। वर्तमान नई पेंशन (एनपीएस) व्यवस्था ने लाखों कर्मचारियों को भविष्य की अनिश्चितता में धकेल दिया है। उन्होंने सरकार से पुरानी पेंशन बहाल करने, 1998-99 से 2004 के शिक्षकों के लिए विशेष नीति बनाने और टेट परीक्षा से मुक्ति की मांग की है।

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