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    मध्याह्न भोजन रसोईया संघ की हड़ताल पर सहानुभूति पूर्वक विचार कर मांगे पूरी करें सरकार ……
    शिक्षक साझा मंच से संबंधित अनेक संगठन उतरे रसोईया संघ की मांगों के समर्थन में …..

    रायपुर //-
    छत्तीसगढ़ प्रदेश में विगत 20 दिनों से अधिक समय से प्रदेश के प्राथमिक एवं मिडिल स्कूलों में बच्चों को मध्याह्न भोजन पका कर खिलाने वाले रसोइयों का हड़ताल चल रहा है। उक्त हड़ताल से प्रदेश के 50 प्रतिशत से अधिक प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में मध्यान्ह भोजन की योजना पर काफी असर पड़ा है।
    हालांकि मध्याह्न भोजन के संचालन का कार्य संबंधित विद्यालय ग्रामों के महिला स्वयं सहायता समूहो द्वारा किया जाता है। खाद्य सामग्रियों की पूर्ति सब्जी एवं सब्जी बनाने के विभिन्न सामग्रियों की पूर्ति मध्याह्न भोजन संचालन समूह द्वारा किया जाता है।
    रसोइयों को तनख्वाह सरकार देती है। अब रसोइयों के हड़ताल में चले जाने से सरकार ने संबंधित महिला स्वयं सहायता समूहों को मध्याह्न भोजन बनाने के लिए कहा है। इसके बाद भी प्रदेश के अधिकांश स्कूलों में एमडीएम नहीं बनने की स्थिति निर्मित हो रही है। यह बात उल्लेखनीय की मध्याह्न भोजन रसोईया विगत 1995-98 से स्कूलों में कार्यरत हैं।
    उक्त रसोईया सुबह 10:00 बजे स्कूलों में खाना बनाने आते हैं। स्कूल आकर आग जालना, गैस चलाना, बर्तन साफ करना, सब्जी काटना, पानी भरना एवं पूरे खाना बनाना। खाना बनाकर बच्चों को परोसने सहित मध्याह्न भोजन संचालन का पूरा काम रसोइयों के द्वारा किया जाता है।
    पूरे कार्य को करते हुए रसोइयों को दिनभर लग जाता है। सुबह 10 – 11 बजे स्कूल गए उन्हें 2:00 से 3:00 बज जाता है। इस प्रकार दिनभर का समय उनको लगता है।
    इसके बदले उन्हें मात्र ₹ 2000 /- महीने का भुगतान होता है।अर्थात एक दिन में लगभग 66 रुपए का ही भुगतान होता है। अब सवाल यह उठता है कि मध्याह्न भोजन रसोईया भी एक मजदूर हैं और उन्हें दिन भर का मजदूरी भी नहीं मिलता।
    केंद्र सरकार के विभिन्न एजेंसीयो द्वारा भी यह कहा जाता है कि किसी भी क्षेत्र के मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी दर कम से कम 220 रुपए प्रतिदिन के आधार पर भुगतान तो होने ही चाहिए। केंद्र सरकार ने न्यूनतम मजदूरी दर रोजगार गारंटी का रखा है। जिसके आधार पर रोजगार गारंटी के मजदूरों को प्रतिदिन ₹ 220 रुपए रोजी मिलता है। जबकि रोजगार गारंटी के अंतर्गत मिट्टी संबंधित खेती कार्य में तीन से चार घंटे में मजदूर अपना काम कर लेते हैं। जबकि इससे ज्यादा समय का काम तो रसोइयों द्वारा किया जाता है।
    छत्तीसगढ़ शिक्षक साझा मंच के तहत विभिन्न संगठनों ने मध्याह्न भोजन रसोईया संघ के हड़ताल का समर्थन दिया है। साझा मंच के विभिन्न प्रदेश अध्यक्षगण रविन्द्र राठौर प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन, विरेंद्र दुबे प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ, कृष्ण कुमार नवरंग प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ गवर्नमेंट एम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन, राजनारायण द्विवेदी प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक महासंघ, भूपेंद्र सिंह बनाफर प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ सर्व शिक्षक कल्याण संघ, धरमदास बंजारे प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ प्रदेश विद्यालयीन शिक्षक संघ, जाकेश साहू प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ जागरूक शिक्षक संघ……
    ……….कमल दास मुरचले प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ संयुक्त प्रधान पाठक संघ, शंकर साहू प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ शासकीय शिक्षक फेडरेशन, विष्णु प्रसाद साहू छत्तीसगढ़ व्याख्याता वाणिज्य विकास संघ, प्रदीप लहरे प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ आम शिक्षक संघ, प्रीतम कोसले प्रदेश अध्यक्ष ट्राइबल एजुकेशन एकीकृत शिक्षक संघ छत्तीसगढ़ एवं अनिल कुमार टोप्पो प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय शिक्षक संघ आदि ने अपना बयान जारी करते हुए राज्य सरकार से मांग की है कि राज्य सरकार द्वारा मध्याह्न भोजन रसोईया संघ के आंदोलन पर सहानुभूति पूर्वक विचार किया जाए तथा सरकार द्वारा मानवीय संवेदना का परिचय देते हुए इनको न्यूनतम मजदूरी भुगतान किया जाना चाहिए।
    क्योंकि प्रदेश के रसोईया भाई बहन लोग भी हमारे स्कूल परिवार के ही एक हिस्से है। स्कूल संचालक के लिए स्कूलों के शिक्षक, मध्याह्न भोजन रसोईया एवं स्कूलों के सफाई कर्मी अर्थात तीनों महत्वपूर्ण कड़ी है। क्योंकि एक ओर जहां स्कूल सफाई कर्मी स्कूल आकर स्कूलों की साफ सफाई करना, स्कूल खोलना बंद करना आदि काम करते हैं। वहीं दूसरी ओर स्कूली बच्चों को शिक्षा देने का काम शिक्षक करते हैं।
    लेकिन स्कूली बच्चों को गरमा गरम भोजन बनाकर खिलाने का सबसे महत्वपूर्ण कार्य रसोइयों द्वारा किया जाता हैं। उन्हें भी जीवन यापन के लिए मूलभूत सुविधाए चाहिए।जिसके अंतर्गत उन्हें रोटी, कपड़ा और मकान की आवश्यकता होती है। उनके भी छोटे-छोटे बाल बच्चे हैं।उनको भी पढ़ाई लिखाई से लेकर सब्जी भाजी, राशन आदि की जरूरत होती है।
    ऐसे में न्यूनतम मजदूरी भुगतान अथवा कलेक्टर दर पर उनका वेतन भुगतान किए जाने की मांग छत्तीसगढ़ शिक्षक साझा मंच से संबद्ध विभिन्न संगठनों ने सरकार से किया है।

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