अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ का 18वां राष्ट्रीय सम्मेलन 23 से 26 जनवरी,2026 तक शिरडी (महाराष्ट्र) में आयोजित किया गया था।
सम्मेलन में बीस प्रस्ताव पारित किए गए थे।
*नीति एवं कार्यक्रम प्रस्ताव निम्नलिखित मांगपत्र पर आधारित थे। जिनके संबंध में आज *राष्ट्रीय मांग दिवस के अवसर पर*26 फरवरी 2026* दोपहर 2:00 बजे भोजनावकाश समय कलेक्ट्रेट परिसर गरियाबंद में प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं।
*1) सभी संविदा कर्मचारियों को नियमित किया जाए। संविदा /आउटसोर्स / दैनिक वेतनभोगी रोजगार बंद किए जाएं। राज्य सरकार के विभागों और पीएसयू में सभी रिक्त पद नियमित आधार पर भरे जाएं।*
*2) पीएफआरडीए एक्ट निरस्त किया जाए; एनपीएस /यूपीएस समाप्त किए जाएं। फंड मैनेजरों को निर्देश दिया जाए कि जमा राशि राज्य सरकारों को वापस करें। ईपीएस-95 के सभी सदस्यों को परिभाषित लाभ पेंशन प्रणाली में लाया जाए। पेंशन अधिनियम 2025 को निरस्त कर ओपीएस के तहत पेंशनरों के अधिकार बहाल किए जाएं।*
*3) चारों श्रम संहिताएं (Labour Codes) निरस्त की जाएं। पीएसयू का निजीकरण / निगमीकरण और सरकारी विभागों का डाउनसाइजिंग बंद किया जाए।*
*4) 8वें वेतन आयोग (CPC) के संदर्भ की शर्तों की समीक्षा की जाए। हर पांच वर्ष में नियमित वेतन संशोधन सुनिश्चित किया जाए। न्यूनतम ₹5000 की शर्त के साथ मूल वेतन का 10% अंतरिम राहत दी जाए।*
*5) सरकार के सहयोग से एक व्यापक स्वास्थ्य / बीमा योजना लागू की जाए, जिसमें सभी अस्पतालों में नकद रहित (कैशलेस) उपचार सुनिश्चित हो और इसमें पेंशनरों, कर्मचारियों तथा संविदा कर्मचारियों को शामिल किया जाए।*
*6) राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को वापस लिया जाए; शिक्षकों के लिए अनिवार्य TET आदेश वापस लिया जाए।*
*7) संविधान के अनुच्छेद 310, 311(2)(a)(b)(c) को निरस्त किया जाए।*
*8) राज्यों में लंबित डीए /डीआर की सभी किश्तें प्रभावी तिथि से एरियर सहित जारी की जाएं।*
*9) केंद्र-राज्य संबंधों को पुनः परिभाषित किया जाए; सहकारी संघवाद (Co-operative Federalism) की रक्षा की जाए।*
*10) संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता को बनाए रखा जाए; सभी प्रकार के सांप्रदायिकता के खिलाफ संघर्ष किया जाए।*
उपरोक्त मांगों के प्रचार-प्रसार के तहत 26 फरवरी 2026 को राष्ट्रीय मांग दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है।
उक्त कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन में बसन्त त्रिवेदी, अनूप कुमार महाड़िक, अमृत भोसले,प्रशांत डबली, सुनील प्रधान,सुनील ताम्रकार,भूपेंद्र सोनी, रजत महतो दुलारी साहू आदि की महत्वपूर्ण भूमिका रही।


