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    विभागीय TET पर शिक्षक साझा मंच ने रखीं मांगें, गृह जिले में परीक्षा और प्रशिक्षण से लेकर परीक्षा प्रक्रिया तक स्पष्ट नीति बनाने पर जोर

    लोक शिक्षण संचालक CBT प्रभारी हिमांशु भारती से मुलाकात कर CBT से पहले प्रशिक्षण और मॉक टेस्ट, गृह जिले में परीक्षा केंद्र तथा उत्तीर्ण अंकों के निर्धारण की मांग; शिक्षकों के सेवा हितों पर स्थिति स्पष्ट करने की अपील

    रायपुर। छत्तीसगढ़ में सेवारत शिक्षकों के लिए प्रस्तावित विभागीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की प्रक्रिया को पारदर्शी, व्यवस्थित और शिक्षक हितैषी बनाने के लिए शिक्षक साझा मंच ने शासन के समक्ष 11 सूत्रीय मांगपत्र प्रस्तुत किया है। मंच ने स्कूल लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक से परीक्षा आयोजन, उत्तीर्ण अंकों, तकनीकी व्यवस्थाओं और सेवा संबंधी प्रावधानों पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।

    मंच ने कहा कि विभागीय TET केवल परीक्षा आयोजित करने तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि इससे हजारों सेवारत शिक्षकों का भविष्य और सेवा संबंधी हित जुड़े हैं। इसलिए परीक्षा की रूपरेखा तय करते समय शिक्षकों के अनुभव, सेवाकाल और व्यावहारिक कठिनाइयों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

    ज्ञापन में परीक्षा की तिथि, पाठ्यक्रम और आवेदन प्रक्रिया समय रहते घोषित करने तथा प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्तर की परीक्षाओं के लिए ऐसी समय-सारिणी निर्धारित करने की मांग की गई है, जिससे इच्छुक शिक्षक दोनों स्तरों की परीक्षा में शामिल हो सकें। CBT प्रणाली से परिचित कराने के लिए प्रशिक्षण, मॉक टेस्ट और गृह जिले में परीक्षा केंद्र उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है, ताकि शिक्षकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

    उत्तीर्ण अंकों और तकनीकी बाधाओं पर स्पष्ट नियम की मांग

    मंच ने आरक्षित वर्ग के लिए न्यूनतम 40 प्रतिशत और अनारक्षित वर्ग के लिए 50 प्रतिशत उत्तीर्ण अंक निर्धारित करने का सुझाव दिया है। साथ ही प्रश्नपत्र में बाल मनोविज्ञान, अध्यापन कौशल और विद्यालयीन गतिविधियों से जुड़े पहलुओं को पर्याप्त महत्व देने की बात कही है। CBT के दौरान सर्वर, नेटवर्क या अन्य तकनीकी व्यवधान उत्पन्न होने की स्थिति में अतिरिक्त समय अथवा पुनः परीक्षा जैसी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई है।

    नौकरी, वेतन और पदोन्नति पर स्थिति स्पष्ट करे शासन

    ज्ञापन में विभागीय TET में शामिल होने के अवसरों की संख्या और निर्धारित समय-सीमा में परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाने की स्थिति में शिक्षकों की नौकरी, वेतन, पदोन्नति तथा अन्य सेवा लाभों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर स्पष्ट नीति जारी करने की मांग की गई है। मंच ने प्राथमिक स्तर पर कार्यरत सहायक शिक्षकों को उच्च प्राथमिक स्तर की पात्रता परीक्षा में शामिल होने का अवसर देने की बात भी रखी है।

    रविंद्र राठौर ने सेवा हितों को प्राथमिकता देने पर दिया जोर

    रविंद्र राठौर ने कहा कि विभागीय TET की रूपरेखा तैयार करते समय सेवारत शिक्षकों के अनुभव, सेवाकाल और सेवा हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। परीक्षा के नियमों और सेवा संबंधी प्रावधानों को पहले ही स्पष्ट कर दिया जाए, ताकि शिक्षकों के बीच किसी प्रकार की अनिश्चितता न रहे।

    प्रदीप पाण्डेय ने प्रशिक्षण और तकनीकी व्यवस्था को बताया जरूरी

    प्रदीप पाण्डेय ने कहा कि CBT परीक्षा से पहले पर्याप्त प्रशिक्षण और मॉक टेस्ट की व्यवस्था अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए। प्रत्येक जिले में सुलभ परीक्षा केंद्र उपलब्ध हों तथा तकनीकी खामियों के कारण किसी शिक्षक को नुकसान न उठाना पड़े, इसके लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए।

    विकास सिंह राजपूत ने पारदर्शी नीति की उठाई मांग

    विकास सिंह राजपूत ने कहा कि परीक्षा के अवसरों, उत्तीर्ण अंकों और सेवा संबंधी परिणामों को लेकर शासन की नीति स्पष्ट होनी चाहिए। परीक्षा प्रक्रिया ऐसी बनाई जाए, जिसमें प्राथमिक और उच्च प्राथमिक दोनों स्तरों की परीक्षा देने के इच्छुक शिक्षकों को समान अवसर मिल सके।

    शिक्षक साझा मंच ने शासन से 11 सूत्रीय मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार कर शीघ्र स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया है। मंच का कहना है कि विभागीय TET का उद्देश्य शिक्षकों को अनावश्यक असमंजस में डालना नहीं, बल्कि स्पष्ट नियमों और उचित व्यवस्थाओं के साथ परीक्षा संपन्न कराना होना चाहिए, ताकि परीक्षा प्रक्रिया के साथ-साथ सेवारत शिक्षकों के हितों का भी संरक्षण सुनिश्चित हो सके।

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