गरियाबंद: फर्जीवाड़े का आरोप, एरियर्स के ₹1.35 करोड़ लौटाने के बजाय सात साल तक खातों में भेजी जाती रही रकम
फिंगेश्वर ब्लॉक में शिक्षा विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल, 63 लाख रुपये के चेक कैश होने का मामला आया सामने
गरियाबंद। जिले के फिंगेश्वर विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में सरकारी राशि के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आया है। दैनिक भास्कर में 9 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित खबर के अनुसार, पंचायत शिक्षकों के एरियर्स भुगतान के लिए वर्ष 2015-16 और 2016-17 के दौरान लगभग 3 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। वर्ष 2018 में पंचायत शिक्षकों का स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन होने के बाद इस योजना की उपयोगिता समाप्त हो गई थी। इसके बावजूद बची हुई राशि को सरकारी खजाने में वापस जमा कराने के बजाय बैंक खातों में रखे जाने और बाद में राशि निकाले जाने का मामला सामने आया है।
खबर के मुताबिक, करीब 1.35 करोड़ रुपये की शेष राशि सरकारी खजाने में लौटाई जानी थी। आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने इस राशि को वापस जमा कराने के बजाय विभिन्न बैंक खातों में बनाए रखा। वर्ष 2018 से 2025 के बीच बंद हो चुके खातों से चेक के माध्यम से लगभग 63 लाख रुपये निकाले जाने की जानकारी सामने आई है।
सात साल तक खातों में चलती रही राशि
प्रकाशित समाचार के अनुसार, पंचायत शिक्षकों के एरियर्स भुगतान के लिए आवंटित राशि का उपयोग योजना समाप्त होने के बाद भी जारी रहा। वर्ष 2018 में शिक्षकों के संविलियन के बाद योजना की प्रासंगिकता समाप्त हो गई थी। ऐसे में बची हुई राशि को नियमानुसार सरकारी खजाने में जमा किया जाना चाहिए था।
लेकिन आरोप है कि ऐसा नहीं किया गया। इसके बजाय राशि विभिन्न बैंक खातों में रखी गई और वर्ष 2018 से 2025 तक उनमें लेन-देन होता रहा। मामले में बैंक चेक के माध्यम से राशि निकाले जाने की बात भी सामने आई है।
बैंक रिकॉर्ड और रजिस्टर में हिसाब नहीं मिलने का दावा
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर सवाल बैंक के चेक और विभागीय रिकॉर्ड को लेकर उठ रहे हैं। प्रकाशित खबर के अनुसार, बैंक में चेक का रिकॉर्ड मौजूद होने के बावजूद विभागीय रजिस्टर में निकाली गई राशि का स्पष्ट हिसाब नहीं मिलने की बात सामने आई है।
यदि जांच में यह आरोप सही पाया जाता है, तो यह सरकारी धन के प्रबंधन और वित्तीय जवाबदेही से जुड़ी गंभीर अनियमितता होगी। मामले में यह पता लगाना जरूरी है कि राशि किसके निर्देश पर निकाली गई और उसका उपयोग कहां किया गया।
अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल
मामले में तत्कालीन और संबंधित अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रकाशित समाचार में तत्कालीन अधिकारियों के बयानों का उल्लेख किया गया है। हालांकि, पूरे मामले में किसकी क्या जिम्मेदारी थी और राशि निकालने की अनुमति किस स्तर पर दी गई, इसका अंतिम निर्धारण जांच के बाद ही हो सकेगा।
खातों का फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायतकर्ताओं ने संबंधित बैंक खातों का फॉरेंसिक ऑडिट कराने और वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच की मांग की है। खबर के अनुसार, शिकायतकर्ताओं ने कलेक्टर से आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) से जांच कराने की मांग भी की है।
जांच में यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि कुल कितनी राशि निकाली गई, किन लोगों ने चेक जारी किए, राशि किन खातों में पहुंची और उसका उपयोग किस उद्देश्य से हुआ।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी पूरी तस्वीर
फिंगेश्वर विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जुड़ा यह मामला सरकारी धन के रखरखाव, विभागीय रिकॉर्ड और बैंक लेन-देन की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन मामले की जांच किस स्तर पर कराता है और कथित वित्तीय अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही कैसे तय होती है।
नोट: यह समाचार आपके द्वारा उपलब्ध कराए गए 9 अक्टूबर 2026 के अखबार की कटिंग के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें उल्लिखित आरोपों को जांच में प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। प्रकाशित खबर में दिए गए आंकड़ों और संबंधित अधिकारियों के बयानों की आधिकारिक दस्तावेजों से पुष्टि करना उचित होगा।


