चेहरों पर खुशी, कदमों में आत्मविश्वास…पुर्व महिला नक्सलियो के रैंप वॉक मामले पर सरकार की उपलब्धि को पचा नहीं पा रहे विरोधी तत्व,पोर्टलो में भ्रामक खबरे प्रसारित कर लाईक और व्यूज बढ़ाने में जुटे
रायपुर। छत्तीसगढ़ में आत्मसमर्पित नक्सली महिलाओं के रैम्प वॉक को लेकर सोशल मीडिया और कुछ मीडिया/न्यूज पोर्टल्स में प्रकाशित खबरों पर राज्य हथकरघा संघ ने स्थिति स्पष्ट की है। विभाग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि 7 अगस्त 2026 को रायपुर के दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम, साइंस कॉलेज ग्राउंड में आयोजित स्वदेशी फैशन-शो में सुकमा जिले की 9 आत्मसमर्पित महिला नक्सलियों ने स्वेच्छा से रैम्प वॉक किया था। इसे लेकर प्रकाशित कुछ खबरों को विभाग ने तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक बताया है।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन तथा ग्रामोद्योग मंत्री श्री गजेंद्र यादव के निर्देशन में ग्रामोद्योग विभाग के सचिव सह प्रबंध संचालक श्री राजेश सिंह राणा की ओर से राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर स्वदेशी फैशन-शो एवं ग्रामोद्योग हथकरघा प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था।
इस आयोजन में राज्य हथकरघा संघ के बिलासा हैंडलूम एम्पोरियम में उपलब्ध कोसा एवं कॉटन वस्त्रों से तैयार परिधानों को फैशन-शो में प्रदर्शित किया गया। इन्हीं परिधानों को सुकमा जिले की आत्मसमर्पित महिला नक्सलियों ने पहनकर रैम्प वॉक किया।
जिला प्रशासन की सहमति के बाद हुआ था कार्यक्रम
विभाग के मुताबिक, जिला पुनर्वास सुकमा एवं जिला प्रशासन की ओर से 19 जुलाई 2026 को सचिव, छत्तीसगढ़ शासन, ग्रामोद्योग विभाग को पत्र भेजकर सुकमा जिले के 9 पुनर्वासित केंद्रों की महिलाओं को स्वदेशी फैशन-शो/प्रदर्शनी में शामिल कराने के लिए लिखित सहमति दी गई थी।
इन महिलाओं के नाम और आवश्यक विवरण भी विभाग को उपलब्ध कराए गए थे। कार्यक्रम में शामिल सभी प्रतिभागियों ने अपनी इच्छा से फैशन-शो में हिस्सा लेने के लिए सहमति दी थी।
प्रेस विज्ञप्ति में जिन 9 महिलाओं के नाम बताए गए हैं, उनमें पोडियम हिड़मे, पोडियम राजे, जोगी बेटी, डोड़ी रमे, माड़वी नंदनी, मड़कम महिमा, कुड़जाम हिड़मे, ओदे भीमे और सुरिशी वेट्टी शामिल हैं।
आत्मविश्वास बढ़ाने और पुनर्वास को मजबूत करने का प्रयास
विभाग ने कहा कि इन आत्मसमर्पित एवं पुनर्वासित महिलाओं की स्वेच्छा से भागीदारी को लेकर जिला प्रशासन द्वारा आवागमन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए समन्वय किया गया था। ग्रामोद्योग विभाग के अनुसार, फैशन-शो में शामिल होकर इन महिलाओं ने आत्मविश्वास के साथ अपनी प्रतिभा प्रदर्शित की।
विभाग का कहना है कि कुछ मीडिया रिपोर्टों में आत्मसमर्पित महिला नक्सलियों द्वारा किए गए रैम्प वॉक को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया, जबकि वास्तविकता यह है कि महिलाओं ने कार्यक्रम में स्वेच्छा से भाग लिया था। विभाग ने इसे उनके आत्मविश्वास में वृद्धि तथा समाज की मुख्यधारा से जुड़ने की दिशा में सकारात्मक कदम बताया है।
रोजगार से जोड़ने की भी तैयारी
प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि सरकार केवल पुनर्वास तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि आत्मसमर्पित एवं पुनर्वासित लोगों को रोजगार के अवसरों से जोड़ने की दिशा में भी काम कर रही है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश और ग्रामोद्योग मंत्री श्री गजेंद्र यादव के मार्गदर्शन में ग्रामोद्योग विभाग द्वारा राज्य हथकरघा संघ के सचिव सह प्रबंध संचालक श्री राजेश सिंह राणा के माध्यम से 8 पुनर्वासित केंद्रों के 20-20 हितग्राहियों को हथकरघा वस्त्र की नवीन बुनाई का प्रशिक्षण देने तथा उन्हें निःशुल्क नवीन करघे एवं आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए 54.40 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है।
प्रशिक्षण के बाद हितग्राहियों को स्थानीय स्तर पर अथवा अपने घर पर ही वस्त्र निर्माण के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराने की योजना है। विभाग का मानना है कि इससे आत्मसमर्पित एवं पुनर्वासित लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उनके सामाजिक एवं आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।
सरकार का स्पष्ट संदेश है कि आत्मसमर्पण के बाद पुनर्वासित महिलाओं को सम्मानजनक जीवन, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ना पुनर्वास नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
आपको बता दें के सरकार की इस उपलब्धि को कुछ विरोधी तत्व पचा नहीं पा रहे हैं और तथाकथित मीडिया का एक वर्ग तथ्यहीन और भ्रामक खबरें प्रसारित कर महज अपने पोर्टल पर लाइक, व्यूज़ और ट्रैफिक बढ़ाने में लगा हुआ है। पत्रकारिता का उद्देश्य सनसनी फैलाना नहीं, बल्कि तथ्यों की पुष्टि कर निष्पक्ष और जिम्मेदार खबर जनता तक पहुँचाना है।”


