*जिले के प्रथम ‘जादुई पिटारा’ निर्माण के लिए शिक्षिका भारती वर्मा सम्मानित*
*सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने जिला स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में किया सम्मानित*
बलौदाबाजार-भाटापारा। जिला स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार और उत्कृष्ट कार्य के लिए विकासखंड सिमगा के शासकीय प्राथमिक शाला पौंसरी की शिक्षिका भारती वर्मा को सम्मानित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि सांसद माननीय बृजमोहन अग्रवाल जी ने उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मान प्रदान किया।
शिक्षिका भारती वर्मा को यह सम्मान एनसीईआरटी, नई दिल्ली के मानकों के अनुरूप छत्तीसगढ़ के स्थानीय परिवेश और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जिले का प्रथम ‘जादुई पिटारा’ तैयार करने के लिए प्रदान किया गया। ‘जादुई पिटारा’ के माध्यम से बच्चों के लिए सीखने की प्रक्रिया को अधिक रुचिकर, सहज, गतिविधि-आधारित और आनंददायी बनाने का प्रयास किया गया है।
शिक्षिका भारती वर्मा लंबे समय से प्राथमिक स्तर के बच्चों के लिए नवाचार आधारित अध्ययन-अध्यापन को बढ़ावा दे रही हैं। वे बच्चों की आयु, शैक्षिक स्तर और रुचियों को ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रम से संबंधित विभिन्न सहायक शैक्षणिक सामग्रियों का निर्माण करती हैं। इन सामग्रियों के माध्यम से अमूर्त एवं कठिन अवधारणाओं को बच्चों के लिए खेल, गतिविधि और प्रयोग के माध्यम से सरल बनाने का प्रयास किया जाता है।
उनका मानना है कि प्राथमिक कक्षाओं में शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित न रहकर बच्चों के अनुभव, परिवेश, खेल और रचनात्मक गतिविधियों से जुड़नी चाहिए। इसी दृष्टिकोण को उन्होंने अपनी शाला की शिक्षण प्रक्रिया में प्रभावी रूप से अपनाया है।
शिक्षिका भारती वर्मा की एक महत्वपूर्ण पहल छत्तीसगढ़ के विलुप्त होते आंचलिक एवं पारंपरिक खेल-खिलौनों के संरक्षण और संवर्धन से भी जुड़ी है। उन्होंने जनसमुदाय के सहयोग से अपनी शाला में प्रदेश के प्रथम खेल-खिलौना संग्रहालय की स्थापना की है। इस संग्रहालय में स्थानीय एवं पारंपरिक खेलों तथा खिलौनों को संजोकर रखा गया है, ताकि नई पीढ़ी अपनी लोक परंपराओं और बाल संस्कृति से परिचित हो सके। यह पहल विद्यालय को समुदाय और स्थानीय संस्कृति से जोड़ने के साथ-साथ बच्चों में अपनी विरासत के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने का माध्यम भी बनी है।
पर्यावरण संरक्षण और बच्चों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने के लिए भी शिक्षिका द्वारा विभिन्न गतिविधियां संचालित की जाती हैं। इसी क्रम में उन्होंने बच्चों और समुदाय के सहयोग से सीड बॉल तैयार कर उनके वितरण का अभियान चलाया। इस पहल के माध्यम से बच्चों को बीज, पौधों, जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण के महत्व से व्यवहारिक रूप से परिचित कराया गया।
शिक्षिका की ये पहलें शिक्षा को विद्यालय की चारदीवारी से बाहर निकालकर समुदाय, संस्कृति, पर्यावरण और स्थानीय जीवन से जोड़ने का उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।
शासकीय प्राथमिक शाला पौंसरी में शिक्षिका भारती वर्मा द्वारा किए जा रहे नवाचारों ने विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों को एक विशिष्ट पहचान दी है। उनके प्रयासों में बच्चों की सहभागिता के साथ-साथ पालकों और जनसमुदाय की भागीदारी भी दिखाई देती है।
जिला स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में मिला यह सम्मान न केवल शिक्षिका भारती वर्मा के व्यक्तिगत प्रयासों की सराहना है, बल्कि प्राथमिक शिक्षा में नवाचार, स्थानीय संसाधनों के उपयोग, लोक संस्कृति के संरक्षण तथा समुदाय आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित करने वाला महत्वपूर्ण सम्मान भी है।
शिक्षा विभाग के जिला स्तरीय अधिकारियों ने शिक्षिका भारती वर्मा को इस उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए कहा कि ऐसे नवाचार प्राथमिक शिक्षा को अधिक प्रभावी, आनंददायी और जीवनोपयोगी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


