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नए राजपत्र में व्यायाम शिक्षकों की उपेक्षा और विसंगतियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ शारीरिक शिक्षा शिक्षक संघ ने खोला मोर्चा, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को सौंपे तीन महत्वपूर्ण ज्ञापन।

​रायपुर: छत्तीसगढ़ शारीरिक शिक्षा शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष रितेश सिंह ने प्रदेश के व्यायाम शिक्षकों की विभिन्न ज्वलंत समस्याओं, पदोन्नति में विसंगतियों और नई शिक्षा नीति के तहत शारीरिक शिक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांगों को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को तीन अलग-अलग ज्ञापन सौंपते हुए भर्ती एवं पदोन्नति नियम 2025 की विसंगतियों एवं व्यायाम शिक्षकों की विभिन्न मांगों की ओर ध्यान आकृष्ट कराया।

संघ के प्रदेश अध्यक्ष रीतेश सिंह और महासचिव मृत्युंजय शर्मा ने संयुक्त रूप से बताया कि सचिव स्कूल शिक्षा विभाग ने संघ की मांगों को ध्यान पूर्वक सुना और सकारात्मक पहल का आश्वासन दिए।
*​संघ द्वारा उठाए गए मुख्य मुद्दे और मांगें इस प्रकार हैं:*

​1- राजपत्र की विसंगतियों को दूर करने और नई भर्ती प्रक्रिया बहाल करने की मांग
​संघ ने राजपत्र क्रमांक 81 (दिनांक 13.02.2026) में की गई गंभीर त्रुटियों पर कड़ी आपत्ति जताई है।
​भर्ती प्रक्रिया विलोपित: नए संशोधन में व्यायाम शिक्षकों की सीधी भर्ती प्रक्रिया को ही विलोपित कर दिया गया है, जिससे यह पद पूरी तरह ‘शून्य’ होने की कगार पर पहुंच गया है। संघ ने मांग की है कि कुल पदों में 80% सीधी भर्ती तथा 20% विभागीय पदोन्नति का स्पष्ट प्रावधान किया जाए।
​न्यूनतम अर्हता: सहायक शिक्षक से पदोन्नति एवं सहायक जिला क्रीड़ा अधिकारी के पद पर पदोन्नति हेतु न्यूनतम योग्यता बी.पी.एड. (B.P.Ed.) डिग्री अनिवार्य की जाए।
​नए पदों का सृजन: विकासखंड क्रीड़ा अधिकारी के नए पद सृजित किए जाएं तथा सहायक संचालक क्रीड़ा के पदों का राजपत्र में स्पष्ट उल्लेख हो।

​2- टी-संवर्ग (Tribal) के व्यायाम शिक्षकों को क्रीड़ा परिसरों में पदोन्नति और प्रतिनियुक्ति का लाभ
​वर्ष 2015 में आदिम जाति विकास विभाग के विद्यालयों का विलय स्कूल शिक्षा विभाग में किए जाने के बाद से ‘टी-संवर्ग’ के व्यायाम शिक्षक पदोन्नति के अवसरों से वंचित हैं।
​प्रदेश के 22 क्रीड़ा परिसरों में कोच के रिक्त पड़े 22 पदों पर इन योग्य व्यायाम शिक्षकों को तत्काल पदोन्नत कर पदस्थ किया जाए।
​इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रतिनिधित्व करने वाले योग्य शिक्षकों को रिक्त सहायक कोच के पदों पर प्रतिनियुक्ति (Deputation) दी जाए ताकि खेल प्रतिभाओं को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण मिल सके।
​3- स्कूल पाठ्यक्रम में ‘शारीरिक शिक्षा’ को अनिवार्य विषय के रूप में शामिल करने की मांग
​माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की “नई शिक्षा नीति 2020″ के मूल उद्देश्यों को रेखांकित करते हुए संघ ने मांग की है कि विद्यार्थियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए छत्तीसगढ़ के स्कूली पाठ्यक्रम में शारीरिक शिक्षा को एक स्वतंत्र विषय के रूप में शामिल किया जाए।
​दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान जैसे राज्यों और सीबीएसई (CBSE) व केंद्रीय विद्यालयों की तर्ज पर राज्य के पाठ्यक्रम में भी इसे स्थान मिलना चाहिए।
​राज्य शैक्षणिक अनुसंधान परिषद (SCERT) द्वारा इसका पाठ्यक्रम पहले ही तैयार किया जा चुका है, जो केवल अनुमोदन हेतु लंबित है। चूंकि शासकीय स्कूलों में पहले से ही स्नातकोत्तर, एम.फिल और पीएचडी धारक उच्च योग्यता प्राप्त व्यायाम शिक्षक पदस्थ हैं, इसलिए इस विषय के अध्यापन में शासन पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार या अड़चन नहीं आएगी।

​”प्रदेश के व्यायाम शिक्षक कोरोना काल से लेकर सामान्य दिनों तक बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए निरंतर मैदान पर पसीना बहा रहे हैं। इसके बावजूद राजपत्र में भर्ती नियमों को शून्य कर देना और पदोन्नति के अवसरों को रोकना न्यायसंगत नहीं है। हम शासन से सकारात्मक और त्वरित कार्यवाही की अपेक्षा करते हैं।” रीतेश सिंह (अध्यक्ष) एवं मृत्युंजय शर्मा (महासचिव), छत्तीसगढ़ शारीरिक शिक्षा शिक्षक संघ

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