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रायपुर: ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री सूर्यघर-मुफ्त बिजली योजना आम लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव ला रही है। इस योजना का एक प्रेरणादायक उदाहरण धमतरी शहर के महात्मा गांधी वार्ड निवासी डॉ. भूपेन्द्र साहू हैं, जिन्होंने सोलर ऊर्जा अपनाकर न सिर्फ बिजली बिल से मुक्ति पाई, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दिया।

डॉ. साहू ने बताया कि योजना की जानकारी मिलते ही उन्होंने विद्युत विभाग में आवेदन किया। प्रक्रिया बेहद सरल और पारदर्शी रही, जिसके चलते मात्र 15 दिनों के भीतर उनके घर की छत पर 3 किलोवॉट क्षमता का सोलर पैनल स्थापित कर दिया गया। आज उनके घर का बिजली बिल लगभग शून्य हो चुका है, जिससे उन्हें हर महीने आर्थिक राहत मिल रही है।

उन्होंने कहा कि पहले बढ़ते बिजली बिल की चिंता रहती थी, लेकिन अब सौर ऊर्जा के माध्यम से निःशुल्क और निर्बाध बिजली मिल रही है। साथ ही, अतिरिक्त बिजली को नेट मीटरिंग के जरिए ग्रिड में भेजकर भविष्य में अतिरिक्त आय की संभावना भी बन रही है। यह योजना केवल व्यक्तिगत लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके सामाजिक और पर्यावरणीय फायदे भी हैं। सौर ऊर्जा के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी आ रही है, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है।

इसके अलावा, सोलर पैनल इंस्टॉलेशन और मेंटेनेंस के क्षेत्र में स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। योजना के तहत 30 हजार से 78 हजार रुपए तक की सब्सिडी दी जा रही है, जिससे मध्यमवर्गीय परिवार भी आसानी से सोलर प्लांट लगवा पा रहे हैं। साथ ही, शेष राशि के लिए सस्ती ब्याज दर पर बैंक ऋण की सुविधा इसे और अधिक सुलभ बना रही है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में यह योजना ऊर्जा पहुंच को मजबूत कर रही है और लोगों की जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव ला रही है।

डॉ. साहू की यह सफलता कहानी इस बात का प्रमाण है कि सही जानकारी और समय पर पहल से सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर हर व्यक्ति अपने जीवन को बेहतर बना सकता है। स्वच्छ ऊर्जा अपनाकर न सिर्फ आर्थिक बचत संभव है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और हरित भविष्य भी सुनिश्चित किया जा सकता है।

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