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    देहरादून । उत्तराखंड में विभिन्न विभागों में खाली पड़े पदों पर भर्ती के लिए अभियान निरंतर जारी रहेगा। प्रदेश में नकल विरोधी कानून लागू होने के बाद योग्य और प्रतिभावान अभ्यर्थियों का चयन हो रहा है। नकल माफिया पर पूरी तरह लगाम लग चुकी है। भविष्य में भी सरकार मेधावियों के हक पर आंच नहीं आने देगी। यह बातें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को सीएम आवास में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में कहीं।

    समारोह के दौरान सीएम ने उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की परीक्षा पास कर सहायक समाज कल्याण अधिकारी बने 35 युवाओं और तीन छात्रावास अधीक्षकों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। सीएम ने नवनियुक्त सभी अफसरों को शुभकामनाएं देते हुए उनसे जीवन में हमेशा अनुशासन बनाए रखने की बात कही।

    उन्होंने कहा कि खुद को अनुशासित रखकर हम सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्रों तक पहुंचा सकते हैं। सभी को अपनी सेवा के दौरान अच्छा काम करके दिखाना है ताकि अंत्योदय का सिद्धांत पूरा हो सके। सीएम ने कहा कि सरकार, विभिन्न विभागों में रिक्त पद भरने के लिए लगातार भर्तियां करा रही है।

    हमारी सरकार ने कड़ा नकल विरोधी कानून लाकर नकल माफिया पर अंकुश लगाने का काम किया है। नकल के अपराध में शामिल लोगों को जेल की सलाखों के पीछे भेजा। अब उत्तराखंड में पूर्ण पारदर्शिता से परीक्षाएं हो रही हैं।

    योग्य और प्रतिभावान अभ्यर्थी ही परीक्षाओं में सफल हो रहे हैं। कई युवा एक से ज्यादा परीक्षाओं में सफल हुए हैं। कार्यक्रम के दौरान सचिव बृजेश कुमार संत, प्रभारी निदेशक जीआर नौटियाल, उप निर्देशक वासुदेव आर्य, मुख्य वित्त नियंत्रक कमलेश भंडारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी गोवर्धन सिंह सहायक निदेशक हेमलता पांडे समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

    प्रदेश में लगातार हो रही भर्तियां, मिल रहे नियुक्ति पत्र
    वर्ष 2023-24 में राज्य लोक सेवा आयोग से सीधी भर्ती के जरिए अब तक 3841 अभ्यर्थियों के चयन की संस्तुति की जा चुकी है जबकि चिकित्सा चयन बोर्ड ने 2713 अभ्यर्थियों का चयन किया है। शिक्षा विभाग में करीब दस हजार पदों पर स्थायी और आउटसोर्स आधार पर भर्तियां करने का लक्ष्य है। इससे पूर्व अफसरों की भर्ती में भी धामी सरकार रिकार्ड स्थापित कर चुकी है।

    लोक सेवा आयोग के आंकड़ों के अनुसार जहां पहले 22 साल में केवल 6869 अफसरों की भर्ती हो पाई थी। धामी के एक साल के कार्यकाल में ही 6635 अफसरों की भर्ती परीक्षा का रिकार्ड बना। पहले जहां लोक सेवा आयोग साल में केवल पांच आठ से दस परीक्षाएं करा पाता था। अब पांच से गुना ज्यादा परीक्षाएं करा पाता है।