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    रायपुर। सहायक शिक्षको की प्राथमिक एचएम पर पदोन्नति की कार्यवाही चल रही इसी बीच एक लीगल नोटिस जारी कर अधिवक्ता ने अधिकारियो को भेज कर पदोन्नति पर न्यायालय की अवमानना का नोटिस भेजा है अधिवक्ता रूपेंद्र देवांगन ने भेजे नोटिस मे कौन पीड़ित पक्ष है उसका पता नहीं अगर लिपिकीय त्रुटि है तो न्यायालय संशोधित आदेश जारी कर सकती थी 8 माह बाद भी इस  त्रुटि पर न्यायालय ने संज्ञान नहीं लिया है अगर किसी का हित प्रभावित होता है तो वो न्यायालय जा सकता है वही आठ महीने बाद भी न्यायालय की लिपिकीय त्रुटि पर सुधार नहीं होना सोचनीय है।

    नोटिसद्वारा प्रधान पाठक प्राथमिक शाला की पदोन्नति सूची जारी किया जा रहा है वह गलत
    है। क्योकि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अपने आदेश में छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा
    (शैक्षिक एवं प्रशानिक संवर्ग) भर्ती तथा पदोन्नति नियम 2019 के तहत् कोई पदोन्नति
    नही किया जाने हेतु आदेशित किया गया है, एवं आपके द्वारा उक्त आदेश को नजर
    अंदाज किया जा रहा है ।
    3. यह कि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश का आशय यह नहीं है कि केवल
    शिक्षक (मिडिल स्कूल ) के पद पर पदोन्नति हेतु रोक नही है बल्कि छत्तीसगढ़ स्कूल
    शिक्षा सेवा (शैक्षिक एवं प्रशानिक संवर्ग) भर्ती तथा पदोन्नति नियम 2019 के तहत्
    सम्पूर्ण पदोन्नति पर रोक है।
    अतः आपसे यह आशा की जाती है कि इस पत्र प्राप्ति के 07 दिवस के अन्तर्गत
    सहायक शिक्षको के पदोन्नति की जो प्रक्रिया चालू की गई है उस पर तुरंत रोक
    लगाया जावें एवं माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश दिनांक 10.02.2022 का
    पूर्ण रूप से अनुपालन किया जावें जिससे माननीय उच्च न्यायालय द्वारा आदेश की
    अवमानना की स्थिति निर्मित न हो।
    इस विधिक नोटिस की एक प्रति मेरे आफिस अग्रमि कार्यवाही हेतु सुरक्षित रखी
    गई है। का मजमून

     प्रधान पाठक प्राथमिक शाला की पदोन्नति सूची जारी किया जा रहा है वह गलत
    है। क्योकि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अपने आदेश में छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा
    (शैक्षिक एवं प्रशानिक संवर्ग) भर्ती तथा पदोन्नति नियम 2019 के तहत् कोई पदोन्नति
    नही किया जाने हेतु आदेशित किया गया है, एवं आपके द्वारा उक्त आदेश को नजर
    अंदाज किया जा रहा है ।
    3. यह कि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश का आशय यह नहीं है कि केवल
    शिक्षक (मिडिल स्कूल ) के पद पर पदोन्नति हेतु रोक नही है बल्कि छत्तीसगढ़ स्कूल
    शिक्षा सेवा (शैक्षिक एवं प्रशानिक संवर्ग) भर्ती तथा पदोन्नति नियम 2019 के तहत्
    सम्पूर्ण पदोन्नति पर रोक है।
    अतः आपसे यह आशा की जाती है कि इस पत्र प्राप्ति के 07 दिवस के अन्तर्गत
    सहायक शिक्षको के पदोन्नति की जो प्रक्रिया चालू की गई है उस पर तुरंत रोक
    लगाया जावें एवं माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश दिनांक 10.02.2022 का
    पूर्ण रूप से अनुपालन किया जावें जिससे माननीय उच्च न्यायालय द्वारा आदेश की
    अवमानना की स्थिति निर्मित न हो।
    इस विधिक नोटिस की एक प्रति मेरे आफिस अग्रमि कार्यवाही हेतु सुरक्षित रखी
    गई है।

    यह कि, इस सूचना पत्र के माध्यम से आपको यह अवगत कराना आवश्यक है कि जो
    आपके द्वारा सहायक शिक्षको के पदोन्नति की प्रक्रिया किया जा रहा है उसमें माननीय
    उच्च न्यायालय द्वारा पदोन्नति में स्थगन आदेश पारित किया गया है।
    यह कि माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष शैलेष कुमार द्वारा प्रस्तुत याचिका जिसका
    डब्ल्यू०पी०एस० नं० 892 / 2022 है। यह मामला अग्रिम सुनवाई हेतु माननीय उच्च
    न्यायालय के समक्ष 02.11.2022 को नियत है जिस पर सुनवाई किया जाना है।
    यह कि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा उक्त मामले में सुनवाई करते हुए अपने आदेश
    दिनांक 10.02.2022 को यह आदेश दिया गया है कि अग्रिम सुनवाई तक किसी प्रकार
    की पदोन्नति जो कि छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा (शैक्षिक एवं प्रशानिक संवर्ग) भर्ती
    तथा पदोन्नति नियम 2019 के तहत् नही किया जावेंगा।
    यह कि, कुछ शिक्षा संभागो के द्वारा सहायक शिक्षको के पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू
    कर दी गई है एवं कुछ संभागो द्वारा पदोन्नति सुची की जारी कर दी गई है जोकि
    अनुचित एवं गलत है एवं यह माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश की
    अवहेलना भी है।
    यह कि, माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश में यह स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़
    स्कूल शिक्षा सेवा (शैक्षिक एवं प्रशानिक संवर्ग) भर्ती तथा पदोन्नति नियम 2019 के
    तहत् किसी भी प्रकार की पदोन्नति नही किया जाना है एवं इस पर रोक लगा दी गई
    है, जबकि आपके द्वारा इस आदेश की अवहेलना करते हुये पदोन्नति सूची जारी किया
    जा रहा है उस पर तुरंत रोक लगाया जावें जिससे माननीय उच्च न्यायालय द्वारा
    पारित आदेश का पालन हो सके।
    . यह कि, आपसे यह आशा की जाती है कि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश
    का पूर्ण रूप से अनुपालन हो ।

    १. यह कि, माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश में लिपिकीय त्रुटि के कारण उक्त
    आदेश में प्रधान पाठक (प्राथमिक शाला) लिखना छुट गया है जिसके कारण आपके

    द्वारा प्रधान पाठक प्राथमिक शाला की पदोन्नति सूची जारी किया जा रहा है वह गलत
    है। क्योकि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अपने आदेश में छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा
    (शैक्षिक एवं प्रशानिक संवर्ग) भर्ती तथा पदोन्नति नियम 2019 के तहत् कोई पदोन्नति
    नही किया जाने हेतु आदेशित किया गया है, एवं आपके द्वारा उक्त आदेश को नजर
    अंदाज किया जा रहा है ।
    3. यह कि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश का आशय यह नहीं है कि केवल
    शिक्षक (मिडिल स्कूल ) के पद पर पदोन्नति हेतु रोक नही है बल्कि छत्तीसगढ़ स्कूल
    शिक्षा सेवा (शैक्षिक एवं प्रशानिक संवर्ग) भर्ती तथा पदोन्नति नियम 2019 के तहत्
    सम्पूर्ण पदोन्नति पर रोक है।
    अतः आपसे यह आशा की जाती है कि इस पत्र प्राप्ति के 07 दिवस के अन्तर्गत
    सहायक शिक्षको के पदोन्नति की जो प्रक्रिया चालू की गई है उस पर तुरंत रोक
    लगाया जावें एवं माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश दिनांक 10.02.2022 का
    पूर्ण रूप से अनुपालन किया जावें जिससे माननीय उच्च न्यायालय द्वारा आदेश की
    अवमानना की स्थिति निर्मित न हो।
    इस विधिक नोटिस की एक प्रति मेरे आफिस अग्रमि कार्यवाही हेतु सुरक्षित रखी
    गई है।

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